भारत को इच्छाधारी लिंग परिवर्तन का वरदान मिला है क्या ? : संजय पटेल


भरत इस देश का राजा था ।
 
उसके नाम पर से ही इस देश का नाम भारत पड़ा है, ऐसा माना जाता है आप मेरी इस बात से तो सहमत होंगे।
 
भारत -पाकिस्तान कि दुश्मनी के वक्त भारत ‘बाप’ हो जाता है और भारत -बांगलादेश दुश्मनी के वक्त “दादा”। मगर देशभक्ती के वक्त भारत हो जाता है “माता”.. 
 भारत को इच्छाधारी “लिंग परिवर्तन” का वरदान मिला है क्या ?  व्याकरण के दृष्टी से यह शब्द “भारत” पुल्लिंग है , स्त्रीलिंगी नही । तो हमें विशुद्ध रुप से ‘भारत पिता की जय’ बोलना चाहिए। 
भारत एक पुरुषवाचक नाम है और हम जय भारत गर्व से बोल सकते है।
वैसे देश के साथ वफादरी करनी चाहिए… रिश्तेदारी नहीं !!!
 सवाल यह है की ये माता कैसे बन गई ?
यह धर्म के ठेकेदार और अभी अभी जो पेंट पहनना शिखे है वो सब ने पिता को माता बना दिया और लोगो के पास भारत माता की जय बुला रहे है।
मगर संघीओ कान खोल के सुन लो तुम जो तुम्हारी भगवे झंडेवाली भारतमाता की जय बुलाना चाहते हो तो वो तो हम कतई नहीं बोलेंगे।
पहले तुम्हारी माँ के हाथ में राष्ट्रध्वज दिलाओ फिर राष्ट्र भक्ति की बात करना। यह भारत देश है यह India है, तुम्हारा हिन्दुस्तान नहीं है तो तुम जो मन चाहे वो हम बोले। 5000 सालो से हमसे बोलने का अधिकार भी छीन लिया था और आज जय बुलवाना है ?
 
भारत के संविधान के पहले आर्टिकल में ही इस देश का नाम साफ़ साफ़ लिखा है की, “India that is Bharat” तो फिर ये हिन्दुस्तान कहा से आ गया ? अरे कोई आम आदमी ऐसा बोले तो ठीक है मगर देश के PM भी इस देश को हिंदुस्तान बोल के इस देश का अपमान कर रहे है।
अगर इनकी नहीं मानोगे तो आपको देशद्रोही बना देंगे।
वो तो ठीक मगर वो लोग तो इस देश का नाम भी बदल देते है तो भी इनपे कोई कार्यवाही नहीं होती।
 
 खैर वो तो बोलेगे ही क्योंकि चड्डी पहनकर सिर्फ यही तो शिखा है शायद अब पेंट पहनकर थोड़ी सी बुद्धि आये ।
 
आज तक आपने दुनिया के किसी भी देश के आगे पीछे माता या पिता लगे हुआ सुना है ? अगर सुना हो तो जरा हमें भी बताइएगा।
 
हम देश को पिता या माता तो नहीं कह शकते मगर भाई हम गर्व से जय भारत जरूर कहेंगे।
 
भारत मेरा देश है और में भारत का रहवासी हु।
में भारतीय हु इस बात का मुझे गर्व है क्योकि में यहाँ का मूलनिवासी हु।
 
हा हम जय बोलेंगे मेरे इश देश की जहा का में मूलनिवासी हु।
 
हम गर्व से कहेंगे 
जय भारत
क्योंकि में पहले भी भारतीय हु और अंततः भी भारतीय…
 
– संजय पटेल
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