गुजरात प्रकरण


पिछले दिनों जब गुजरात में चमारों को ब्राह्मणों ने मारा तब से देख रहा हूँ हर तरफ जैसे रैलियों प्रदर्शनों की एक बाढ़ जैसी आ गई है. जिस किसी को देखो ब्राह्मण के अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़ा हुआ नज़र आता है. हर टीवी, समाचार पत्र दलित-दलित चिल्लाता नज़र आ रह है. अक्सर ऐसे ही बदलाव एक क्रांति के कारण बनते है लेकिन भारत को लेकर ऐसा कहना गलत होगा. क्योकि यहाँ के आदमी सही और गलत में भेद नहीं कर पाते. उनका सोचने का स्तर आज भी ब्राह्मण लोग ही तय करते है. कहीं भी ऐसी कोई घटना घटती है ब्राह्मण टीवी पर एक कांफ्रेंस का आयोजन करते है और उस में हर घटना को दलित और उच्च वर्ग में होने वाली घटना करार दे देते है. जिस का असर साफ़ साफ़ देखने को मिल जाता है. जो शोषित वर्ग है वह दलित बन जाता है और दूसरा शोषण करने वाला वर्ग उच्च वर्ग बन जाता है. यही सब गुजरात की घटना के साथ भी हुआ. यहाँ तक तथाकथित दलित नेता भी ब्राह्मणों की इस राजनीती को नहीं समझ पाते. आखिर ऐसा होता क्यों है तो मुझे एक ही कारण नज़र आता है, हजारों सालों से मानसिक गुलामी की मानसिकता असल में इन सभी के लिए उतरदायी है.

जब भी शोषित और उच्च वर्ग के बीच जब ऐसी घटनाएँ घटती है तो वह असल में दलित और ब्राह्मण या शोषित और उच्च वर्ग का मुद्दा होता ही नहीं है. वह तो मूलनिवासी और विदेशी का मुद्दा होता है. फिर चाहे वो भारत के किसी भी राज्य में क्यों न घटित हुआ हो. ब्राह्मण बहुत चालक है और वह जानता है कि किस घटना को कैसा रूप देना है.जब भी दलित और ब्राह्मण की बात होगी ब्राह्मण उस पर राजनीती करेगा. उसका सही से जबाब देगा और उन घटनाओं को दबा देगा. क्योकि ब्राह्मण को अब अभ्यास हो गया है कि कैसे घटना को अंजाम देना है और उसके बाद कैसे खत्म करना है. अगर गुजरात की घटना को मूलनिवासी और विदेशी के बीच घटित घटना कहा जाता मूलनिवासी के अधिकारों और न्याय के लिए संघर्ष किया जाता तो ब्राह्मण चुप हो जाता उसके पास इस बात का कोई उत्तर नहीं होता. यहाँ तक टीवी चैनल पर भी कोई भी बहस का आयोजन नहीं होता. क्योकि ब्राह्मण जानता है मूलनिवासी और विदेशी वाली बात वह सार्वजानिक नहीं कर सकता जबकि सुप्रीम कोर्ट भी इस बात को मानता है कि ब्राह्मण विदेशी है. ब्राह्मण की पूरी दुनिया में किरकिरी होती और पूरी दुनिया जान जाती कि ब्राह्मण जो असल में विदेशी आर्य है आज भी भारत के मूलनिवासियों पर धर्म और जाति के नाम पर अत्याचार कर रहे है.

इन सभी घटनाओं से पता चल जाता है कि देश में बनाये गए 80 हज़ार से ज्यादा मूलनिवासी संगठन जो गर्व से अपने आपको अम्बेडकरवादी कहते है सभी गलत दिशा में कार्य कर रहे है. आज एक भी ऐसा संगठन नहीं है जो सही दिशा में कार्य कर रहा हो. सभी संगठनों के नेता किसी न किसी तरह ब्राह्मण को ही बढावा दे रहे है या ब्राह्मण का सहयोग कर रहे है. क्योकि जो ब्राह्मण चाहता है अगर हम वही करेंगे तो तो वह एक तरह से ब्राह्मण को बढावा देना ही तो होता है. बाबा साहब ने कहा था जब भी ब्राह्मण जोर से चिलाता है समझ जाओ कि खतरा है, जब ब्राह्मण चुप होता है तब हमे जोर से बोलना चाहिए होता है. लेकिन यहाँ तो तथाकथित दलित नेताओं ने किसी को कुछ भी बोलने के काबिल ही नहीं छोड़ा. अगर ये तथाकथित दलित नेता राजनीती करना छोड़ कर सही दिशा में कार्य करते तो आज पूरी दुनिया को पता चल जाता कि भारत के मूलनिवासी आज भी गुलाम है और विदेशियों के अत्याचारों के शिकार बन रहे है. युनओ जैसे विश्व स्तरीय संस्थाओं में भारत के मूलनिवासियों की आवाज़ गूंज रही होती. ब्राह्मण पर हर तरफ से दबाब बना होता.

दोस्तों अपनी मानसिकता बदल डालो अपना सोचने का तरीका बदल डालो. जो सही हो उस पर ध्यान दो. जो ब्राह्मण कहता है उसको मत मानो. जब तक आप वही मानते रहोगे तब तक आप लोगों का भला किसी भी हाल में नहीं हो सकाता और वह नेता जो कहते है कि आपको पता नहीं है कि काम कैसे किया जाता है उन नेताओं को जूते मारो. सही और असल में फर्क करना सीखो तभी मूलनिवासी लोग ब्राह्मण की गुलामी से आज़ाद हो पाएंगे. गुजरात के साथ साथ आज देश के ज्यादातर हिस्सों में मूलनिवासियों के ऊपर विदेशी ब्राह्मणों के अत्याचार एक दम बढ़ गए है. देश के कोने कोने से हर रोज हजारों समाचार प्राप्त हो रहे है कि कही बलात्कार हो रहे है कही मारपीट हो रही है कही महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रह है. यह सब असल में विदेशियों द्वारा मूलनिवासियों को दबाने के लिए किये जाने वाले प्रयास है. दयाशंकर का ब्यान भी असल में मूलनिवासियों को मुख्य मुद्दे से भटकना था. लेकिन तथाकथित दलित नेता इन बातों को समझ नहीं रहे है और अपने मनमाने ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे है जोकि मूलनिवासियों की आने वाली पीढ़ी को उस गर्त में लेके जायेगा जहाँ से आने वाले हजारों बर्षों तक निकालना मुश्किल हो जायेगा.

अभी 2017 में बहुत से राज्यों में चुनाव होने जा रहे है यह सब चुनावों के पृष्ठ भूमि बनाने के लिए किये जा रहे प्रयास है. हर कोई अपने अपने लिए मुख्य मुद्दे से हट कर पृष्ठ भूमि बनाने के लिए कार्य कर रहा है फिर चाहे वो ब्राह्मण हो या तथाकथित दलित नेता. हमे इस सोच को बदलना होगा अपनी मानसिकता में परिवर्तन करना होगा सही तरीके से सही लड़ाई लड़ानी होगी तभी मूलनिवासी सफल हो जायेंगे. आज सुबह समाचार मिला कि गुजरात के 1000 मूलनिवासी बौद्ध धर्म को अपनाने जा रहे है ताकि वो लोग भविष्य में फिर से ऐसी घटनाओं के शिकार न बने. यही सही भी है बाबा साहब अपने अंतिम बर्षों में ब्राह्मणवाद का अंतिम उपाय धर्म का त्याग करना बता गए लेकिन कितने लोग उनकी बात को समझ पाए. यहं एक प्रश्न उन दलित नेताओं और सगठनों पर भी उठता है कि वो नेता आखिर सब जानते हुए धर्म परिवर्तन क्यों नहीं करते? असल में वो तथकथित नेता अपनी राजनीती चमकाने के चक्कर में होते है. उनको कोई फर्क नहीं पडता कि हमारा समाज या हमारे लोग कहाँ जा रह एही और उन पर क्या बीत रही होती है. उनको तो सिर्फ राजनीती करने से मतलब होता है.

दोस्तों बाबा साहब के बताये रास्ते पर चलो. हिंदू धर्म का त्याग करो और एक हो जाओ. जिस दिन हम हिंदू धर्म से बाहर निकल जायेंगे ब्राह्मणों के पास हमारा शोषण करने और हम पर अत्याचार करने के कोई बहाना नहीं रह जायेगा और मूलनिवासी हमेशा के लिए आज़ाद हो जायेगा.

Advertisements

About Bheem Sangh

Visit us at; http://BheemSangh.wordpress.com
This entry was posted in Bheem Sangh, Current Affairs and tagged , , , , . Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s