शंकराचार्यों का षड्यंत्र


देश में नयी सरकार बनने के बाद जो भी हो रहा है बहुत शर्मनाक हो रहा है। ब्राह्मण धर्म का हर शंकराचार्य किसी ना किसी तरह देश के संविधान और संवैधानिक नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है। जोकि देश और संविधान की गरिमा के खिलाफ है। संविधान के आर्टिकल 25 के तहत हर रोज सभी शंकराचार्य अपराध कर रहे है। जोकि भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध है। स्वरूपानंद, निश्चलानंद, प्रवीण तोगडिया, मोहन भागवत जो भी ब्यान दे रहे है वो सभी ब्यान असंवैधानिक और अपराध है। यह लोग अपने आप को धर्म गुरु या धर्म रक्षक कहते है हर रोज अपराध और संविधान का अपमान कर रहे है। स्वरूपानंद ने कहा है कि देश के दलितों को मंदिर में जाने का कोई अधिकार नहीं है। स्वरूपानंद का यह ब्यान पूरी तरह से संविधान के खिलाफ है। देश का संविधान हमे मंदिर जैसे हर सार्वजनिक स्थानों में जाने की पूर्ण आज़ादी देता है।

Padamदोस्तों यह सब कुछ इन शंकराचार्यों द्वारा जानबूझ कर किया जा रहा है। यह यूरेशियन लोगों का मूलनिवासियों के खिलाफ धर्म के नाम पर जानबूझ कर रचा गया षड्यंत्र है। लेकिन मूलनिवासी लोग यह बात समझ नहीं रहे है और तरह तरह की बाते कर के इन पाखंडी देश द्रोहियों को ग़लतफ़हमी में बचा रहे है। संविधान में देश के मूलनिवासियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है, पिछले 66 सालों में देश में एक भी ऐसी सरकार नहीं बनी है जो आरक्षण को सही तरीके से लागू करवा पाई हो। आज भी देश की 90% सरकारी नौकरियों पर ब्राह्मणों का कब्ज़ा है, यह लोग इतने स्वार्थी है कि अपने ही भाइयों क्षत्रिय और वैश्यों को भी अपने साथ सरकारी नौकरियों में नहीं लिया है। संविधान के अनुसार मूलनिवासियों को देश के हर आय के स्त्रोत पर आरक्षण मिलाना चाहिए तो सभी मूलनिवासियों को मंदिरों में भी आरक्षण की मांग करनी चाहिए। क्या आप सभी को पता है कि इंडिया के मंदिरों में हीरे-मोती, सोना, चांदी आदि के रूप में लगभग 14 Trillion US Dollar के सम्पति काले धन के रूप में छुपा कर रखी गई है। और उस सम्पति के मालिक उन मंदिरों के देवी देवता है। जबकि संविधान के अनुसार कोई जिन्दा प्राणी ही किसी सम्पति का स्वामी हो  सकता है तो ब्राह्मणों ने षड्यंत्र रच कर माननीय उच्तम न्यायलय से फैसला लिया था कि मंदिर की सम्पति उस देवता की होगी जो उस मंदिर में स्थापित है। अगर सही रूप से देखा जाये तो मंदिरों की सम्पति सार्वजनिक सम्पति होती है और देश की सम्पति होनी चाहिए थी। उस सम्पति का प्रयोग देश हित और देश के सभी नागरिकों के लिए बिना धर्म जाति और पंथ पर विचार किये होना चाहिए था।

यह पाखंडी धर्म गुरु देश की मूलनिवासियों को गलत ढंग से गुमराह कर रहे है। और मंदिरों में छुपाई है सम्पति पर सिर्फ अपना एकाधिकार स्थापित रखना चाहते है। यह हमारा अनुमान है कि देश के मंदिरों में 14 Trillion US Dollar की सम्पति हो सकती है। लेकिन साला में यह सम्पति इस से दुगनी या लगभग बीस गुना भी हो सकती है। इंडिया में धर्म के नाम पर यह सबसे बड़ा घोटाला इन धर्म गुरुओं ने कर रखा है। अगर इस घोटाले की सही से छानबीन की जाये तो आज के समय में यह धर्म घोटाला दुनिया का सबसे बड़ा घोटाला हो सकता है। जहा लोगों को बेबकुफ़ बना कर उनको ठग कर उनसे पैसे ले लिए जाते है और उसके बदले कभी भी किसी भी आदमी को आज तक कुछ नहीं मिला। मंदिरों में छुपी यह सम्पति मानवता या मानव के लिए कभी भी प्रयोग नहीं की गई है, और ना ही देश के लिए इस सम्पति से कोई योगदान दिया गया है। दोस्तों बहुत से लोग आप पर विश्वास करते है कि अप उनकी जिंदगी बदल दोगे। उनकी आने वाली पीढ़ियों का जीवन स्तर सुधारोंगे। इसलिए सभी मूलनिवासियों से प्रार्थना है कि इस तरह की कोई भी भ्रामक बाते समाज में ना फैलाए और अनजाने में इन धर्म गुरुओं का बचाव ना करे।

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