रामायण का सच


इस बार आप सभी सोच रहे होंगे कि आखिर इस बार दशहरे पर भीम संघ ने कोई पोस्ट क्यों नहीं डाली। तो दोस्तों बात यह है कि हम देखना चाहते थे कि मूलनिवासी इस बार दशहरे पर क्या क्या करते है? आखिर मूलनिवासी समाज दशहरे या रामायण के बारे क्या विचार रखता है। पिछले दिनों हमने देखा लाखों मूलनिवासी रावण के अनुयायी बन गए है और कई दिनों से जय रावण जय रावण चिला रहे है। अपनी मनगढंत कहानियां बना बना कर रावण को महान और महात्मा साबित करने की पूरी कोशिश हो रही है। रावण एक महात्मा था, अपनी बहन का रक्षक था, मूलनिवासी राजा था, राम पापी था और ना जाने क्या क्या। एक ऐसी काल्पनिक घटना को सच साबित करने की कोशिश हो रही है जो ना कभी घटी और ना जिसके कोई प्रमाण मौजूद है। आखिर आप लोग बाबा साहब के बताये रास्ते पर कब चलाना शुरू करोगे? बुद्धि और तर्क का रास्ता, सचे ज्ञान और अन्धविश्वास से दूर ले जाने वाला रास्ता, हमने देखा मूलनिवासी भी आज पूरी तरह ब्राह्मणवादी होते जा रहे है। कोई भी बाबा साहब के दिखाए रास्ते पर चलने के बजाये खुद के ब्राह्मणवादी प्रभाव से बनाये रास्ते बना कर उन पर चल रहे है। आज मूलनिवासी समाज भी पूरी तरह से ब्राह्मणवाद से ग्रसित हो चूका है। सबसे बड़े ब्राह्मणवादी तो वो लोग है जो रामायण जैसी काल्पनिक कहानी को सच मान कर जय रावण जय रावण चिला रहे है। दोस्तों एक मिनट के लिए रुको अपने दिमाग को सोचने का मौका दो और सोचो, क्या आप भी रामायण के रावण को महात्मा बता कर, लोगों को उसका अनुयायी बना कर, एक तरह से ब्राह्मणवादी काल्पनिक कहानियों को सच साबित करने में ब्राह्मणों का सहयोग नहीं कर रहे हो? जो किसी भी तरह से मूलनिवासी समाज के लिए उचित नहीं है। आप लोग कहोगे कि आपके पास क्या प्रमाण है कि रामायण एक काल्पनिक कहानी है? तो दोस्तों हम आपके लिए कुछ प्रमाण भी देंगे कृपया उन प्रमाणों पर गौर करे और सही बात को समझे। ब्राह्मणवाद आप चाहे किसी भी तरह से अपना लो, उसके खलनायकों का सहयोग करो या विरोध करो दोनों प्रकार से मूलनिवासी समाज के लिए जहर के समान है जिससे मूलनिवासी समाज की मृत्यु निश्चित है।

ramayaआइये आपको बताते है कि आखिर रामायण क्या है। रामायण पुष्यमित्र शुंग के राजकबि वाल्मीकि की कल्पना से लिखी गई एक मनगढंत कहानी है। जो पुष्यमित्र शुंग को भगवान का अवतार स्थापित करने के उद्देश्य से लिखी गई थी। जिसका उद्देश्य मूलनिवासी समाज के लोगों के मन में एक बार फिर देवातावाद या अवतारवाद का डर बैठाना था। ब्राह्मणों के विष्णु भगवान और ब्राह्मणवाद का अस्तित्व भारत में बौद्ध धर्म के उदय के बाद पूरी तरह समाप्त हो चूका था। लोगों ने विष्णु को भगवान और ब्राह्मणों के अवतारवाद को मानना बंद कर दिया था। गौतम बुद्ध ने जो क्रांति की मशाल जलाई थी उसके प्रकाश के आगे ब्राह्मणवाद हर प्रकार से मूलनिवासियों को दबाने में असफल हो चूका था। लोग काल्पनिक कहानियों को मानना छोड़ कर सच, समता, न्याय और बंधुत्व के मार्ग पर चलने लगे थे। उस समय वाल्मीकि नाम के एक ब्राह्मण ने फिर से ब्राह्मणवाद को स्थापित करने और मूलनिवासियों के मन में अवतारवाद का भय बिठाने के लिए रामायण जैसी ब्राह्मणवादी और काल्पनिक कहानी को लिखा। रामायण लेखन पुष्यमित्र शुंग की एक चाल थी जिससे मूलनिवासी धर्म के नाम से डरे और ब्राह्मणवादी सामाजिक प्रणाली वर्ण व्यवस्था को अपना ले। ब्राह्मण वाल्मीकि के रामायण लिखने का प्रभाव यह हुआ कि भारत के सभी लोगों ने पुष्यमित्र शुंग को राम समझ कर भगवान मानना शुरू कर दिया और बृहदत्त जो भारत के महान मूलनिवासी बौद्ध राजा अशोक का पोता था उसको रावण समझ कर समाज पर कलंक और बुरा समझना शुरू कर दिया। पुष्यमित्र शुंग के समय से ही ब्राह्मणों ने चतुराई पूर्ण ढंग से, धर्म के नाम पर पाखंड करके और आडम्बर को बढ़ावा देकर रामायण को हमेशा सच साबित करने की कोशिश जारी रखी, मूलनिवासी समाज के अनपढ़ और भोले भाले लोग ब्राह्मणों की चतुराई को समझ नहीं सके और आज भी किसी ना किसी तरह से रामायण को सच मानते है और रामायण जैसी काल्पनिक कहानी का सही तरीके से विरोध ना करके ब्राह्मणों के दिखाए रस्ते पर चल कर किसी ना किसी तरह से रामायण को सच साबित करने में लगे हुए है।

असल इतिहास के मुताबिक़ भारत में 1000 इसवी में भारत पर बौद्ध राजा बृहदत्त शासन था और पाटलिपुत्र बृहदत्त की राजधानी थी। उस समय पुरे भारत अर्थात पाकिस्तान, भारत, बंगलादेश, चीन, भूटान, नेपाल और श्रीलंका में बौद्ध धम्म अपने चरम पर था। मूलनिवासी राजा महाराज अशोक जो गौतम बुद्ध के अनुयायी थे ने गौतम बुद्ध की शिक्षाओं के अनुसार शासन करते हुए पुरे भारत को बौद्धमय बना दिया था। लोग जातिवाद और ब्राह्मणवाद के विरोधी हो गए थे। ब्राह्मणों द्वारा बनाई वर्ण व्यवस्था को भारत के निवासियों ने नकार दिया था। सभी भारतवासी समता, समानता, न्याय और बंधुत्व के आधार पर स्थापित बौद्ध धम्म को मानने लगे थे। ब्राह्मणों के बुरे दिन शुरू हो चुके थे भारत के निवासियों ने मंदिरों में जाना बंद कर दिया था। दान, कर्मकांडों और पूजा पाठ आदि की व्यवस्था भारत से लुप्त होती जा रही थी। जिसके कारण ब्राह्मणों के भूखे मरने और मेहनत करने के दिन आने लगे थे। अर्थात ब्राह्मणों के सभी प्रकार के मुफ्त में धन और सम्मान हासिल करने की प्रथा के बंद होने के कारण ब्राह्मणों को भी मेहनत करनी पड़ रही थी। भारत के निवासी ब्राह्मणों के धर्म गर्न्थों, प्रथाओं और परम्पराओं के विरोधी हो गए थे और ब्राह्मण धर्म पूरी तरह खतरे में पड़ गया था। उस समय ब्राह्मणों ने पुरे भारत से ब्राह्मणों को बुला कर एक सभा का आयोजन किया। सभा में मूलनिवासी महाराजा बृहदत्त को मारने और भारत में फिर से ब्राह्मण धर्म को स्थपित करने की साजिश रची गई। षड्यंत्र के मुताबिक़ मूलनिवासी बौद्ध राजा बृहदत्त को मारने का कार्य पुष्यमित्र शुंग नाम के एक सैनिक को सौंपा गया जोकि महाराज बृहदत्त की सेना में एक सिपाही था। पुष्यमित्र शुंग ने योजना के मुताबिक एक दिन बृहदत्त को भरे राज दरबार में तलवार से पेट पर वार करके मार डाला और पाटलिपुत्र पर कब्ज़ा करके खुद को देश का राजा घोषित कर दिया। पाटलिपुत्र का नाम बदलकर अयोध्या रख दिया गया। जिसके प्रमाण इतिहास में आसानी से मिल जाते है, इतिहास के मुताबिक़ पाटलिपुत्र वही पर था जिसको आज अयोध्या कहा जाता है। अयोध्या का शाब्दिक अर्थ भी “बिना युद्ध के जीती गई राजधानी” ही होता है। अयोध्या को जीतने के लिए पुष्यमित्र शुंग ने कोई युद्ध नहीं किया था बल्कि षड्यंत्र से हासिल किया था। बृहदत्त की मृत्यु के बाद पुष्यमित्र शुंग ने सम्पूर्ण भारत से बौद्ध धर्म को समाप्त करने की योजना बना कर बौद्ध भिक्षुओं पर तरह तरह के अत्याचार करने शुरू कर दिए। बौद्ध भिक्षुओं के घर, मठ और रहने के स्थान जला दिए गए, बौद्ध भिक्षुओं के द्वारा स्थापित विद्यालयों को भी आग के हवाले कर दिया गया जिससे बुध भिक्षुओ द्वारा लिखी गई लाखों किताबे आग में जल कर स्वाह हो गई। लाखों बौद्ध भिक्षुओं को मौत के घाट उतार दिया गया और देश में फिर से वर्ण व्यवस्था को स्थापित किया गया। जिन मूलनिवासी लोगों ने सीधे बिना किसी विरोध के ब्राह्मणों की गुलामी और वर्ण व्यवस्था को मानना शुरू कर दिया वो लोग आज के भारत में ओबीसी के नाम से जाने जाते है। कुछ लोगों ने पुष्यमित्र का विरोध किया और नगरों से भाग कर दूर जा बसे। उन लोगों में से कुछ लोग भूख, प्यास और बदहाली की जिंदगी से परेशान होकर पुष्यमित्र शुंग की शरण में जा पहुंचे। उन्होंने भी ब्राह्मण धर्म और वर्ण व्यवस्था को स्वीकार किया जिनको आज के भारत में एसटी के नाम से जाना जाता है। लेकिन जो मूलनिवासियों का समूह ब्राह्मण धर्म और वर्ण व्यवस्था के खिलाफ नगरों से दूर रहता था उस समूह ने पुष्यमित्र शुंग के खिलाफ युद्ध शुरू कर दिया। लेकिन ओबीसी और एसटी नाम के आधे मूलनिवासी पहले ही पुष्यमित्र शुंग के साथ होने से मूलनिवासियों के उन योद्धाओं के समूह को युद्ध में हार का सामना करना पड़ा। युद्ध में हारे हुए उन योद्धाओं को आज के भारत में एससी के नाम से जाना जाता है। उसके बाद पुष्यमित्र शुंग ने अपने राजकवि वाल्मीकि को एक ऐसी कहानी लिखने का आदेश दिया जिससे पुष्यमित्र शुंग सदा के लिए इतिहास में अमर हो जाये। मूलनिवासियों के मन में सदा के लिए ब्राह्मणवाद और अवतारवाद का डर बैठ जाये, भारत में हमेशा के लिए वर्ण व्यवस्था स्थापित हो जाये। पुष्यमित्र शुंग के आदेश पर वाल्मीकि ने रामायण नामक एक काल्पनिक कहानी की रचना की और पुष्यमित्र शुंग ने ब्राह्मणों को आदेश देकर इस काल्पनिक कहानी को भारत के कोने कोने में पहुंचा कर सच साबित करने में लगा दिया। ना तो कभी रावण हुआ, ना कभी राम हुआ और ना ही रामायण जैसी कोई घटना घटी लेकिन पुष्यमित्र शुंग के षड्यंत्र में फंसे लोग आज भी रामायण को सच मानते है।

रामायण 1000 इसवी के बाद लिखी गई इस के बहुत से प्रमाण मौजूद है। उदाहरण के लिए यहाँ एक प्रमाण दिया जा रहा है जो भाषा के विकास से सम्बंधित है। विज्ञान के मुताबिक किसी भी भाषा के लिपि तक के विकास में कम से कम 800 से 1000 सालों का समय लगता है और अगले 1000 सालों में वह भाषा समाप्त भी हो जाती है। अर्थात एक भाषा की उम्र 2000 साल होती है। यह भी सर्व मान्य है कि आज से 2000 साल पहले किसी भी भाषा की कोई लिपि नहीं थी और यह बात विज्ञान ने भी प्रमाणित की है। अर्थात संस्कृत की 800 इसवी तक कोई लिपि नहीं थी। जिस भाषा की कोई लिपि ही ना हो उस में किसी भी प्रकार के साहित्य की रचना असंभव है। 800   इसवी में संस्कृत भाषा की बुनियादी लिपि बनी और उसके विकास में भी कम से कम 200 से 300 सालों का समय लगा। तो रामायण की रचना भी 1000 इसवी के बाद ही की गई है।

यहाँ एक बात और जिसको यहाँ कहना बहुत जरुरी है अगर आप रामायण, महाभारत, गीता, वेद, पुराणों आदि काल्पनिक धर्म शास्त्रों में विश्वास करते है। उन पर बहस करते है तो आप भी एक ब्राह्मणवादी हो जो काल्पनिक कहानियों के चक्कर में फंस कर किसी ना किसी प्रकार से ब्राह्मणवाद को बढावा दे रहे हो। जय रावण बोलकर हमारे समाज का उद्दार नहीं हो सकता। क्योकि इसका सीधा अर्थ है आप वाल्मीकि की काल्पनिक कहानी को सच मानते हो। अगर रामायण को सच मानते हो तो आपको उसमें दी गई शिक्षाओं और वर्ण व्यवस्था को भी सच मानना पड़ेगा। और आप एक ब्राह्मणवादी साबित हो जाओगे। हमराप सभी को सची रामायण नाम की किताब को पढ़ना चाहिए जो हाई कोर्ट द्वारा प्रमाणित किताब है। जिस से आपको रामायण की असलियत समझने में आसानी होगी। रामायण असल में एक कथा है एक कहानी है जिसके नाम पर पाखंड और आडम्बर करके ब्राह्मणों ने मूलनिवासी लोगों को गुलाम बना रखा है।

आज के बाद जय रावण नहीं सिर्फ “जय भीम। जय। मूलनिवासी।।”

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45 Responses to रामायण का सच

  1. vinod ukey says:

    Very true narration

  2. KR Maheshwari says:

    बहुजन जागृती की और आपका यह एक अच्छा कदम है धन्यवाद

  3. Brajpal Singh says:

    Seems Impressive and Authentic explanation, big like

  4. RAJESHWAR says:

    LOGON ME JAGRUKTA ABI TAK NAHI AAYE

  5. rajbhatala says:

    बहुत अच्छा

  6. sunilkumarlangan says:

    सत्य सत्य होता है ,,,सब को पता होना चाहिए , इस अनादर कि दलदल लोग बाहर आ सकें

  7. k.c.chaudhary says:

    जय भीम नमो बुध्दाय । भाई साहाब आप व्दारा इतनी अच्छी तर सब कुछ समझाया है इस धूर्त समाज की समझ नही आयेगा । इस समाज को पत्थर पूजा पर अडिग विश्वास हो गया । सारी बीमारी पूजा से ही ठीक होती है । यह हम सब की बात कैसे समझे ।

  8. k.c.chaudhary says:

    बहुजन जागृती kaa आपका यह एक अच्छा कदम है धन्यवाद

  9. sumer says:

    Bahut achchha

  10. Ajay kumar jaiswal says:

    Aapne likha hai आज से 2000 साल पहले किसी भी भाषा की कोई लिपि नहीं थी और यह बात विज्ञान ने भी प्रमाणित की है। अर्थात संस्कृत की 800 इसवी तक कोई लिपि नहीं jabki gautam buddh ka janm aaj se 2500 sal pahle hua tha aur unke sishyon ne unke updesh lipibadhdha kiye the yahi nahi ved bhi tab tak likhe ja chuke the isi tarah kai granth 2000 sal pahle ke likhe ja chuke the maine itihas ke books se check kiya hai

    • Bheem Sangh says:

      अजय जी बुद्ध के सन्देश पाली भाषा में लिखे गए है जोकि एक बहुत पुराणी भाषा है… ज्यादा जानकारी के लिए कृपया भाषा के इतिहास पर हुए शोध पढ़े… या मेकाले द्वारा लिखित किताब “History of India” का अध्ययन करे… 🙂

  11. ss chohan says:

    is lekh me ek point puraa galat hai…..ki…2000 saal pahle kisi
    Bhi bhashaa ki koi lipi nahi thi……jabki ashok ke shilaalekh..
    (273….232..)….tha….
    Ye ek kora jhuth lagtaa hai……koi bhi mitra vidvaan is baat ko
    Clear kijiye…

    • Bheem Sangh says:

      सम्राट अशोक के शिलालेख कौन सी भाषा में लिखे गए है.. कृपया पहले इस पर अध्ययन करे… आपके सभी सवालों का जबाब आपको मिल जायेगा… 🙂

  12. ravan budhaa says:

    gr8 history of ravan .

  13. Bhoopendra Ken says:

    ‘२०००’साल पहले किसी भी भाषा की कोई लिपि नहीं थी ‘ऐसा कैसे संभव है जब २५०० वर्ष पहले गौतम बुद्ध के समय और उनसे भी पहले सिंधु घाटी सभ्यता के समय भी भाषा तथा लिपि के सबूत मिलते हैं …

  14. khair singh thaneshwar says:

    me bhopendra ji sahamat hu kripaya spast karein
    or ek baat mane ramayan ka such or ram ka such dono article pade lekin dono ki kahani alag hai aisa kaise sambhav hai kripya spast karein

  15. प्रदीप सैनी (सिकंदर माली)उ0प्र0 हमीरपुर says:

    श्रीमान जय मूल निवासी का भाव अपने अंदर रखे हुये आज मैं आप की इस बेबसाइट तक पहुँच गया जो मेरे ज्ञानकोष को बडाती है दिल की एक इच्छा है की मै मूल निवासियों के लिये कभी कुछ बडा करू और शायद वो दिन आयेगा जब ब्राम्हन वाद का खात्मा होगा और मेरा भी योगदान होगा मै तो खुद का प्लान भी तक बना चुका हूँ बस साधन और संसाधन हों आज अकेला हूँ बेरोजगार हूँ पर आखरी तक इस पे काम करुगाँ सिर्फ अपनी ही बुद्धी से अपनी ही छमता से ( जय पिछडा वर्ग, जय दलित समाज)

  16. सिकंदर माली says:

    थैंक्स फार दिस जनरल नोलेज. आई intresting news reed mulnivaasi.

    • प्रवेश द्विवेदी says:

      Jia Bheem…

  17. bheem ka beta says:

    Jai Bheem

  18. Jai Bheem

  19. surendra Prasad says:

    इस तरह की अमूल्य जानकारी देने के लिए आपको धन्यवाद। इस तरह की बातें खूब फैलाओ। ताकि सचची बात सामने आये।

  20. akash gaikwad says:

    Jai bhim
    Mai apke itna padha to nahi hu or nahi kabhi details mai koi keetab padhi hai apke ek lekh mai Maine padha ki ram hai par dashrath ka putra nahi kisi sadhu ka hai jaise anya 3 Bhai or ab aap kehrahai hai ki ram tha hi nahi ye battt kuch samajh mai nahi arrahi hai.

    • Bheem Sangh says:

      बंधू उस पोस्ट में सिर्फ रामायण नामक काल्पनिक कहानी का विश्लेषण किया गया था… राम नाम का कोई भी आदमी कभी नहीं हुआ…

      • DEVENDRA KUMAR PATEL says:

        जय भीम
        जय मूलनिवासी।

  21. Siddharth Maurya says:

    Helo
    Jai bhim
    Apka jan jagran ka prayas bohut uttam h. Mne kai sari post padhi. Niyog, ramayan etc.
    All are nice And shi disha m h.
    Ek anurodh bhi h apse . Ap k lekhan m maurya time ki events aur buddha aur bouddh dharm s judi hui chize ki timeline shi kre. Mne dekha h ki kai jagah pr in events ki timeline m correction required h. Esa krne s apka post shi facts k sath hi akaatya ho jayega.

    hope u understand me..
    regards,
    Siddharth Maurya
    Shahjahanpur U.P.
    9917479580

  22. anop says:

    I belive in indian constution only
    Its my relegion

  23. rRAJU AHIRWAR says:

    आशा करता हूँ की इस तरह आप नए पोस्ट भेजते रहें जय भीम जय मूल निवासी

  24. RAJU AHIRWAR says:

    JAI BHIM

  25. Jay kodape says:

    ये सही है कि राम का कोई अस्तित्व नहीं है पर रावण का अस्तित्व है और ये जानने के लिए भारत के गोंड आदिवासी रावण को क्यू अपना पूर्वज मानते हैं ये पहले आपको पता करना पड़ेगा, आदिवासी का मतलब पिछड़ा नही होता है आदिवासी वे है जिन्होंने हजारों सालों से अपनी भाषा और संस्कृति को जिंदा रखा है, और आप कह रहे हैं कि आदिवासियों ने ब्राह्मणों की गुलामी स्वीकार की अगर वो ब्राह्मणों की गुलामी स्वीकार करते तो आज आदिवासी नही कहलाते, आदिवासी अपना टोटम और भाषा बचा के रखे हुए हैं इसलिए आदिवासी है, वो obc और sc थे जिन्होंने ब्राह्मणों की गुलामी स्वीकारी थी, तभी वो अपना टोटम और भाषा भूल चुके हैं, मत भूलिए बुद्ध भी एक आदिवासी थे उनका टोटम वृषभ (बैल) था

  26. SHUBHAM SASANE says:

    Jai Buddha..!!! Jai Bhim…!!!! Jai Bharat…!!!

  27. fagu ram hansda says:

    तो श्रीलंका ओर भारत के बिच कथित तोर पे पुल सच हे या झूठ? सच क्या हें?

  28. Raj Kumar says:

    you say story is imaginary, I also think so but existence of Ramsetu which is in the see put me in doubt. Will it will be considered for more light

  29. Santosh surywanshi says:

    भारत वह जो भारतीयों के उत्थान के लक्ष को प्राथमिकता दें; बुद्ध वह अकेले महात्मा है; जो यह कर सके; ब्राह्मनवाद का अंत ही …भारत निर्मान है !

  30. mohinder singh says:

    sir mahabharat ke bare mai bhi kutchh batao

  31. रवीन्द्र कुमार says:

    बिल्कुल सही रामायण और वेद पुराण सब केवल कोरी कल्पनायें हैं !

  32. डॉ सामंत एम। मानकर says:

    जय भीम जय मूलनिवासी

  33. PRAKASH RAO SAMRAT says:

    Very Nice ..I Agree with you. Thanks for the real information about Ram And Rawan.

  34. pritpal says:

    If you have any whatsapp group please add my no 99*****

  35. Lalit MASAR says:

    ललित

  36. Lalit MASAR says:

    Ramayn ka scc

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