बाबा साहब का अंतिम सन्देश


पिछली रात को सोते सोते सोच रहा था कि मैं उन लोगों के लिए क्या लिखूं, जो पढ़े लिखे है, समझदार है। लेकिन फिर भी ब्राह्मणों के बनाये धर्म, जात्ति और पंथ के नाम पर निरर्थक बहस करते हुए अपनी जिंदगी बर्बाद कर देते है। मैं आधा सोया और आधा जगा हुआ था। तभी दिमाग में एक ख्याल आया “बाबा साहब का अंतिम सन्देश लिख दे” जो सचा अम्बेडकरवादी या मानवतावादी होगा खुद ब खुद समझ जायेगा। और जो सिर्फ अम्बेडकरवादी होने आडम्बर करते है समाज के लोगों को गुमराह करते है उनसे वैसे भी तेरा भला नहीं होने वाला। वो चिलाते रहेंगे। क्योकि उनका मकसद ही है चिलाना, लोगों को बांटना, मूलनिवासी समाज के लोगों को एक ना होने देना। दोस्तों, नीचे बाबा साहब का अंतिम सन्देश लिख रहा हूँ। जो समझ गया वो सिकंदर…… जो ना समझे वो…….. । आप खुद समझदार है।
Last Message of Bheem Rao Ambedkar31जुलाई 1956, दिन मंगलवार, मैँ  सायं 5.30 बजे डाक की गठरी लिए बाबा साहेब के पास पहुँचा वे बरामदे मे स्टूल पर गद्दी रखकर अपने पैर टिकाए बैठे थे और उन्होने सिर कुर्सी की बैक पर टिका रखा था। उनका थका मांदा चेहरा मैँ चुपचाप देखता रहा और थोड़ी देर बाद बाबा साहेब जाग गए। जल्दी जल्दी पत्रो के उत्तर लिखवा कर मेरे कंधे का सहारा लेते हुए सोने के कमरे मे गए और तुरंत लेट गए एक सवाल काफी दिनोँ से मेरे मन मे हलचल मचा रहा था। पर मेरी हिम्मत नही पड़ती थी। क्योँकि बाबा साहेब का गुस्सा ज्वाला मुखी की तरह फटता था।  मैँने साहस बटोर कर अर्से से मन मे दबा प्रश्न पूछ ही लिया, “सर, आजकल आप बहुत दुखी और हताश क्योँ दिखते हो,बीच बीच मेँ रो भी पड़ते हो,क्षमा करेँ,पर बताएँ जरुर…।” कुछ क्षणोँ की चुपी तोड़ते वे उद्विग्न हो उठे और भावुकता के कारण आवाज   रुँध गई और कहा,”तुम नही जानते कि मुझे किस बात का गम है और किन कारणोँ से मैँ इतना दुखी हूँ। पहली चिँता तो मुझे यह है कि मै अपने जीवन मैं अपना मिशन पूरा नही कर पाया। मैं अपने जीवन में अपने लोगोँ को शासक वर्ग के रूप मे देखना चाहता था जहाँ वे राजनीतिक शक्ति के हिस्सेदार बने। मैं तो लगभग अपंग और बीमारी के कारण बिस्तर से लग गया हूँ। मैं तो चाहता था पढे लिखे लोग मेरे मिशन को आगे बढाऐँगे। मैं जो कुछ कर सका उससे पढे लिखे लोग मौज उडा रहे हैँ, अशिक्षित ग्रामीणो की हालत ज्योँ की त्योँ बनी हुई है। लगता है मेरा जीवन थोड़ा ही बचा है। मैं तो चाहता था बहुजनोँ मे से कोई आगे आए और मेरे आंदोलन को आगे बढाने की जिम्मेदारी ले पर मुझे ऐसा कोई नही दिखता पढे-लिखे और राजनेता जिन पर मैने भरोसा किया था मिशन को आगे बढाऐँगे। वे नेतृत्व और शक्ति के लिए आपस मे लड़ रहे है। लंबी सांस लेते हूए और गीली आँखो से आँसू पोँछते हुए बाबा ने कहा, “नानक चंद मेरे लोगोँ को बता देना कि जो कुछ मैने किया है, वह अपने विरोधियो की चारोँ और से गालियाँ, विरोधियोँ से संघर्ष और कुचल कर रख देने वाली बाधाओँ से गुजरकर कर पाया हूँ। मैं बहुत मुश्किल से इस कारवाँ को यहाँ तक लाया हूँ। यह कारवाँ आगे ही बढते रहना चाहिए। चाहे कितनी ही बाधाएँ, रुकावटेँ, परेशानियाँ क्योँ न आएं,  रत्तू, मेरे लोग यदि इस कारवाँ को आगे नही ले जा सकते इसे यहीँ रहने दे किसी भी हालत मे पीछे न जाने देँ।“

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11 Responses to बाबा साहब का अंतिम सन्देश

  1. Mukesh Kumar says:

    Plz hame bhi apne samaj ki bhalai karne ke liye sath len….

  2. Sunil Baburao Garud says:

    Babasahebji ne sahi kaha tha aaj hum dekh rahe hai hamare padhe likhe log hi unki alochna kar rahe hai, samaj jaye bhad me iski une koi chinta nahi hai, paisa kamana hi inka mission hai.
    Jaybhim.

  3. ISHWARI LAL PANCHE says:

    JAI FULE JAI MULNIWASI

  4. chaitanya kumar says:

    baba saheb ke vicharo ko samajhna bahut muskil he unki kahani sunkar sabki akhon se ansoo nikal padenge.

  5. AMIT KUMAR says:

    क्रपया हिन्दी में भी वुक अपलोड करे

  6. DEEPAK SOHIT says:

    KYA LIKHU PATA NAHI. AAPKA LEKH PADA ACHA HAI. MERE PAAS PAISA YA ZAMEEN NAHI. JISKE BUL PER MAIN APNI SAMAJ MEIN SUDHAR LA SAKU. HA PER MAINE 5 KASME KHA RAKHI HAI.
    1. MAIN JEEVAN MAIN KABHI NASA NAHI KARUGA.
    2. MAIN JEEVAN MAIN KABHI MAAS NAHI KHAUGA.
    3. MAIN JEEVAN MAIN KABHI KISI BHI TARHA KA JUA NAHI KHELUGA.
    4. MAIN MARTE-MARTE HINDU DHARM CHOOD DOOGA.
    5. MAIN APNE BACCHE KO SIKSIT BA SWABIMANI BANUGA.
    YAHI BABA SAHEB KO MERI SAHI SHRADHNJLI HOI.
    JAI BHEEM

  7. vijay kumar jadhav says:

    jab babasaheb ka ye sandesh padhta hoon toh meri aankhen bhar aati hi…lekin jo baba ne kaha hi , kiya hi…hum unke ehasaan mand zaroor hi..par be gairth hona gaddari hi..mere baba zinda hote toh ye din hamare nhi hote ..oonchayiaan hamri kadam choomti thi…JAiBHEEM…

  8. adil khan` says:

    Aaj Baba Sahab Ka Jeevan Parichay Padhkar Bahut Kushi Bhi Hui Aur Bahut Dukh Bhi Hua.. Aur Baba Sahab Ke Mission Ko Jaldi Pura Karne Ka Jajba Bhi Aya.. Soch Hai Ki Baba Sahab Ke Mission Ko Jaldi Pura Kroon.. Apne Sabhi Moolnivasi Bhaio Ko,,
    PYAR SE Jai BHEEM , Jai Moolnivasi Jay Bharat. mera name ajay hai mera abhi email id nahi hai par mai dusre ke name se bhej raha hoon mai office boy hoon aur mujhe abhi email banana nahin ata

  9. veershetty rampure says:

    Babasaheb ji karva belkol chaliga balaki bharat ki har mulnivashi log ek den Lala khelapar bharat ka gaurav ka jhanda lahariga jai bheem

  10. anil ahirwar says:

    jay bheem

  11. Chandan kudmi says:

    बाबा साहब हम आपके साथ हैँ। हम आपके मिसन को ज़रूर पूरा करेंगे। ब्रह्मनबाद को खत्म करना, अब हमारी यही चाहत है। मेरा निरन्तर यही प्रयास है की मैं ब्रह्ममवाद को पूरी तरह से खत्म कर दूँ।।। मुझे तो ब्राह्मण को देखने से ही मारने मन करता है।
    जय मूलनिवासी।।।। जोहार।।

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