राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ का पर्दाफाश


मुल्क में जब भी कोई आतंकवादी हमला हुआ उसका इल्‍ज़ाम आँख बंद करके मुसलमानों के सर थोप दिया गया, लेकिन जब हकीकत सामने आई तो उन आतंकवादी हमलों के पीछे ऐसे लोगों का हाथ नज़र आया जो अपने अलावा किसी दूसरे को देशभक्त समझते ही नहीं हैं। यही संघ परिवार ये पहाड़ा पढ़ता रहता था कि हर मुसलमान आतंकवादी नहीं होता, लेकिन जितने भी आतंकवादी हैं सब मुस्लमान हैं। ऐसा लग रहा था कि संघ परिवार के लिए सात खून माफ है और संघ परिवार से सर्टिफिकेट लिए बिना कोई भी भारतीय देशभक्त हो ही नहीं सकता, लेकिन जब जाँच की दिशा बदली तो आतंकवादी हमलों के पीछे ऐसे ऐसे चेहरे नज़र आने लगे, जो संघ के बहुत ही करीबी माने जाते थे. दूसरों को देश भक्ति का आईना दिखाने वाले संघ को जब आतंकवाद के आईने में अपना चेहरा नज़र आने लगा तो वह तिलमिला उठा और अब वह मुल्क के हिन्दू भाइयों को गुमराह करने लगा है.

RSS Exposedसंघ हिन्दू भाइयों को समझाने में लगा है कि संघ के लोग कुछ भी करें उनके खिलाफ़ कारवाई नहीं की जा सकती, इसलिए के संघ पर कारवाई का मतलब हिन्दू धर्म पर हमला है। बहरहाल, आज के इस संक्षिप्त लेख में मैं अपने हिन्दू भाइयों और पाठकों के सामने थोड़े शब्दों में वे घटनायें सामने रखना चाहता हूं, जिन से बार-बार हमारे देश को जूझना पड़ा। अभी चर्चा केवल उनकी जिनकी जांच का निष्कर्ष सामने आ गया है या आता जा रहा है। हो सकता है शेष घटनाओं की भी नये सिरे से छानबीन हो तो ऐसा ही कुछ सामने आये। यह कुछ मिसाल इसलिए कि हमारी सरकारी और खुफिया एजेंसियां और हिन्दू भाई बहन ये अंदाजा कर सकें कि उन बम धमाकों के बाद किन लोगों को संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया गया था और जब सच सामने आया तो किनके चेहरे सामने आये।

मालेगांव धमाका (8 सितम्बर 2006) 37 हताहत

शुरू में जो व्यक्ति गिरफ़्तार हुए, वे सल्मान फ़ारसी, फ़ारुक़ अब्दुल्ला मख़दूमी, रईस अहमद, नूरुलहुदा, शम्सुलहुदा, शब्बीर बीड़ी वाले। बाद की जांच : 2008 के मालेगांव बम धमाकों में हिन्दू आतंकवादियों के सामने आने के बाद अन्य मामलों में भी शक की सूई भी हिन्दू आतंकवादियों पर ही गई, इन सब आतंकवादियों के तार किसी न किसी रूप में आरएसएस से जा मिलते हैं ।

समझौता एक्सप्रेस बम धमाका (18 फ़रवरी 2007) 68 हताहत, अधिकतर पाकिस्तानी नागरिक

आरम्भिक जांच में लश्कर तथा जैश-ए-मुहम्मद पर आरोप लगाया गया और इस सिलसिले में पाकिस्तानी नागरिक अज़मत अली को गिरफ़्तार किया गया। बाद की जांच में सामने आया कि इन घटनाओं के पीछे हिन्दू आतंकवादी हो सकते हैं। इन धमाकों में जो पद्धति प्रयोग की गई है, वह मक्का मस्जिद के धमाकों से मिलती हुई है। इस मामले में पुलिस को आरएसएस के प्रचारक संदीप डांगे तथा रामजी के नाम सामने आये।

मक्का मस्जिद धमाका (18 मई 2007) 14 व्यक्तियों की मृत्यु

आरम्भ में स्थानीय पुलिस ने 80 मुस्लिम युवकों को गिरफ़्तार किया और उनसे पूछताछ की गई, जिनमें से 25 व्यक्तियों को गिरफ़्तार कर लिया गया, कोई सबूत न मिलने पर इनमें से इब्राहीम जुनैद, शुऐब जागीरदार, इमरान खान तथा मौहम्मद अब्दुल हकीम इत्यादि को सम्मानपूर्वक बरी कर दिया गया। बाद की जांच के बाद जो परिणाम सामने आया वह इस प्रकार है। 2010 में सीबीआई ने घोषणा की कि वह इस मामले में 2 अभियुक्तों के बारे में सही सूचना देने वालों को 10 लाख रुपये का इनाम देगी। फिर इस मामले में संदीप डांगे, राम चन्द्र कालसिंगा तथा लोकेश शर्मा को गिरफ़्तार किया गया। इनका भी रिश्ता संघ से बताया जाता है ।

अजमेर शरीफ़ धमाका (11 अक्तूबर 2007) 3 हताहत

जैसा कि अधिकांश बम धमाकों के बाद होता रहा है। पहले हूजी, लश्कर पर धमाकों का आरोप लगाया गया तथा जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया वह भी मुसलमान ही थे, उनमें अब्दुल हफ़ीज़, शमीम, खशीउर्रहमान, इमरान अली शामिल थे। 806 पृष्ठों पर आधारित आरोप पत्र में जो राजस्थान एटीएस ने एडीश्नल चीफ़ जूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में दाखिल की है, इसमें 5 अभियुक्तों के नाम डाले गए हैं। अभिनव भारत के देवेन्द्र गुप्ता, लोकेश शर्मा और चन्द्रशेखर हैं। यह पुलिस की हिरासत में हैं, जबकि संदीप डांगे तथा रामजी कालासांगा फ़रार बताये जाते हैं जिनका सम्बन्ध आरएसएस से रहा है ।

थाणे बम धमाका (4 जून 2008)

हिन्दू जन जागृति समिति तथा सनातन संस्था इस धमाके के पीछे बताई जाती हैं और रमेश हनुमंत गडकरी और मंगेश दिनकर निकम गिरफ़्तार किये गए थे। इन धमाकों का उद्देश्य फ़िल्म ‘जोधा अकबर’ के प्रदर्शन के विरुद्ध विरोध जताना था।

कानपुर तथा नांदेड़ बम धमाके (अगस्त 2008)

कानपुर में बजरंग दल के 2 सदस्यों राजीव मिश्रा, भूपेन्द्र सिंह बम बनाते समय धमाका होने से मारे गए थे। अप्रैल 2006 में एन राजकोंडवार और एच पानसे नांदेड़ में बम बनाते समय मारे गए थे, वे दोनों भी बजरंग दल के थे।

मालेगांव-2 (29 सितम्बर 2008) 7 हताहत

आरम्भ में कहा गया था कि इस धमाके में इंडियन मुजाहिदीन शामिल है परन्तु बाद में अभिनव भारत तथा राष्ट्रीय जागरण मंच के लिप्त होने की बात सामने आई। उसमें प्रज्ञा सिंह ठाकुर, कर्नल पुरोहित और स्वामी अम्बिकानंद देवतीर्थ (दयानंद पाण्डे) गिरफ़्तार हुए। यही वह बम धमाके थे,  जिनकी जांच शहीद हेमंत करकरे कर रहे थे और जिससे आतंकवादियों का वह चेहरा सामने आया, जिसके बारे में पहले सोचा ही नहीं जाता था। लेकिन जैसे जैसे जांच आगे बढ़ती गई परतें खुलती र्गइं। अगर 26/11 के आतंकवादी हमले में हेमन्त करकरे शहीद न होते तो शायद आज आतंकवाद का यह सम्पूर्ण नेटवर्क हमारे सामने होता। फिर भी उनके जाने के बाद भी यह सिलसिला रूका नहीं है। अजमेर बम धमाके की जांच के परिणाम हमारे सामने है, जिससे संघ की नींद हराम हो गई है।

गोवा धमाका (16 अक्तूबर 2009)

इस धमाके में जो 2 व्यक्ति मारे गए, वे सनातन संस्था के कार्यकर्ता थे, मरने वाले मालगोंडा पाटिल तथा योगेश नायक उस समय मारे गए थे जब वह विस्फ़ोटक पदार्थ लेकर स्कूटर से जा रहे थे और उसमें अचानक धमाका हो गया। जिस समय नांदेड़, कानपुर तथा गोवा में बम बनाते या ले जाते हुए यह लोग हताहत हुए, अगर उसी समय हमारी खुफिया एजेंसियों तथा एटीएस ने मुस्‍तैदी से काम लिया होता तो सम्पूर्ण नेटवर्क का पर्दाफाश हो सकता था, या कम से कम किस मानसिकता के लोगों का कारनामा था और किस स्तर के लोग इन षड्यंत्रों में लिप्त हैं, यह सामने आ सकता था। बात केवल कुछ लोगों के पकड़े जाने या एक डायरी में कुछ नाम लिखे होने की नहीं है, बल्कि असल बात यह है कि आतंकवाद का यह सिलसिला थम क्यों नहीं रहा था? शायद इसलिए कि हमने इस दिशा में कभी सोचा ही नहीं था, जिस दिशा में आज न केवल सोचा जा रहा है, बल्कि कार्यन्वयन करने का प्रयास भी किया जा रहा है। निसंदेह 26 नवम्बर 2008 को हुआ आतंकवादी हमला अत्यंत विडम्बनापूर्ण तथा शर्मनाक था, लेकिन उसके बाद से अगर छोटे-छोटे मामलों की चर्चा न कि जाये तो कहा जा सकता है कि लगभग पिछले दो वर्षों में देश किसी बड़े आतंकवादी हमले का शिकार नहीं हुआ। क्या इसका एक कारण यह भी है कि अब आतंकवाद में लिप्त वह चेहरे सामने आने लगे हैं ।

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5 Responses to राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ का पर्दाफाश

  1. wajid says:

    The most cases are happend with the link of RSS , then why RSS is not banned in our country ? If RSS is banned , then our country is safe .

  2. Pt. Ganesh semwal says:

    R. S. S. Gud. Sagtan.

  3. nilesh gadge says:

    Jay bhim

  4. Bhimrao Gajbhiye says:

    जब तक संविधान में धर्मनिरपेक्ष शब्द मौजूद हैं तबतक कोई भी माई का लाल सांप्रदायिकता का जहर फैला नहीं सकते। सभी देशों में संविधान इसी प्रकार का बना है। जिस दिन कोई भी सरकार इसे बदलने की कोशिश करेगा UN से उसकी छुट्टी हो जाएगी। भारत में भी यही डर सत्ता रहा है इसलिए मोदीजी इनकी बातें RSS ,VHP, BAJRANG DAL SANATAN SANSTHA तव्वजो ना दे कह रहे हैं। उनके कॅबिनेट मंत्री भी इस बात को अच्छी तरह जानते है।
    बाबासाहब की जयजयकार करना उनकी मजबूरी बन गई हैं। उनको तो विष्णु का अवतार भी मानने लगे हैं। हमारे दलित नेता भी अब अछुतता का अनुभव नहीं कर रहे है। धन्य हो कांशिराम साहब की जिनकी सोच के कारण भारत की जनता बदल रही है। बहुजन हिताय से सर्वजन हिताय तक का सफर।

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