फुले विचार


mahatma_phuleआज ब्राह्मणों की तुलना में शूद्र-अतिशूद्रों की संख्या 10 गुना ज्यादा है। फिर भी ब्राह्मणों ने शूद्रों और अतिशूद्रों को कैसे मटियामेट कर दिया? कैसे गुलाम बना लिया ?
इसका जबाब ये है कि एक बुद्धिमान चतुर आदमी दस अज्ञानी लोगों के दिलो दिमाग को अपने पास गिरवी रख सकता है। और दूसरी बात ये है कि वे दस अनपढ़ लोग यदि एक मत के होते तो उन्होंने उस चतुर आदमी की एक न चलने दी होती। किन्तु ये दस लोग दसों अलग-अलग मतों के होने की वजह से ब्राह्मणों-पुरोहितों जैसे धूर्त पाखंडी लोगों के जाल में फंस गए। उन धूर्त पाखंडियों को इन दस भिन्न-भिन्न मतवादी लोगों को अपने जाल में फ़साने में कुछ भी कठनाई न हुयी। उसी तरह शूद्र-अतिशूद्रों की विचार प्रणाली एक दूसरे से मेल न करें। इसलिए प्राचीन काल में ब्राह्मण-पुरोहितों ने एक बहुत बड़ी धूर्र्तापूर्ण और बदमाशी भरी विचारधारा निकाली। उन्होंने शूद्र-अतिशूद्रों में आपस में घृणा और नफरत की भावना बढ़ती रहे। ऐसी योजना तैयार की, उन्होंने समाज में प्रेम के बजाये जहर के बीज बोये। इस योजना के तहत उनकी चाल यह थी कि यदि शूद्र-अतिशूद्र आपस में लड़ते झग़डते रहेंगे तब ही यहाँ अपने टिके रहने की बुनियाद मजबूत रहेगी। अपनी इस चाल, विचारधारा को कामयाबी देने के लिए जातिभेद की फौलादी जहरीली दीवारें खड़ी करके उन्होंनेइसके समर्थन में अपने जातिये स्वार्थ सिद्धि के कई ग्रन्थ लिख डाले। 

कुछ लोग जो ब्राह्मणों के साथ बड़ी कड़ाई और जिद से लड़े उनका ब्राह्मणों ने एक वर्ग ही अलग कर दिया। परिणाम ये हुआ कि उनका आपसी मेल मिलाप बंद हो गया और वे लोग अनाज के एक-एक दाने के लिए मुह्ताज हो गए। इसलिए इन लोगों को जीने के लिए मजबूर होकर मरे हुए जानवरो का मांस खाना पड़ा। इन्ही को अछूत कहा गया ये वर्ग ही अंत तक ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करते रहे।

उनके व्यवहार को देखकर आज के शुद्र जो बहुत ही अहंकार से अपने आप को माली, कुणबी, सुनार, दरजी, लुहार, बढ़ई, तेली, कुर्मी आदि बड़ी बड़ी संज्ञाएँ लगाते है क्योकि वे लोग केवल इस प्रकार का व्यवसाय करते है। और ब्राह्मण-पांडा-पुरोहितों के बहकाबे में आकर एक-दूसरे से घृणा करना सीख गए है। ये लोग भगवान् की निगाह में कितने अपराधी है इन सबका आपस में इतना बड़ा नजदीकी सम्बन्ध होने पर भी किसी तीज त्यौहार को ये उनके दरवाजे पर दूर से ही पका पकाया भोजन मांगने के लिए आते जाते है। तो वे वे लोग इनको नफरत की निगाहो से देखते है। इस तरह जिन-जिन लोगों ने ब्राह्मण-पांडा-पुरोहितों से जिस जिस तरह से संघर्ष किया, उन्होंने उसके अनुसार ही उनको जातियों में बांटकर सजा सुना दी।
जब से ब्राह्मणों ने शूद्र-अतिशूद्र में जातिभेद की भावना को पैदा किया बढ़ावा दिया। तब से उन सभी के दिलो दिमाग आपस में उलझ गए। और वे नफरत से अलग अलग हो गए। ब्राह्मण- पुरोहित अपने षड्यंत्र में कामयाब हो गए। इस बारें में एक कहावत प्रसिद्ध है कि “दो के झग़डे में तीसरे को लाभ” मतलब यह कि ब्राह्मण-पांडा-पुरोहितो ने शूद्र-अतिशूद्रों में आपस में नफरत के बीज जहर की तरह बो दिए। और खुद उन सभी की मेहनत पर ऐशो आराम भोग रहे है।
ज्योतिराव फुलेजी कहते है समाज में शुद्र और अतिशूद्रों को मानसिक गुलामी से आज़ाद होने के लिए को जातियों को तोड़कर एकजुट होना होगा।

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One Response to फुले विचार

  1. VIJAY LOKHANDE says:

    PICHODE KE JINE KA ADHAR AKMATR , ARAKSHAN HI HE,,,,,,AB SABKUCH PRIVATIKARAN KIYA JA RAHA HE YE BRAMHNO KI CHAL HE GOVT,,ME ARAKSHAN MANGNE SE NAHI MILTA ,,,PRIVATE SECTOR ME KAHA SE MILEGA,,,ISILIYE TO RAILWAY KA PRIVATIKARAN KA VICHAR HE KI KHUD B KHUD ARAKSHAN BAND HO JAYE………AWR SC,ST,.OBC ,,VJ.NT..SB ARAKSHAN WALE BHUKHE MARE MAHAGAYI SE ,,GARIB TO WO HI HOTE HE NA,,,,SARIKARI HASPATAL…SARIKARI..SCHOOL…YAHA..SB SUVIDHAYE KYO NAHI KI VAHA PR GARIBO KE HO BACCHE HOTE HE AWR GARIB KAWN ,,,SAVARN YA MULNIVASI…..YE TO KOI BHI SAMAZ LEGA,,,,TO ARAKSHAN KE BAJASE SE SB JI KHA ,,RAHE HE,,,,BAMAN INKE VOTO PR CHUNKE AA RAHE HE ….AWR ARAKSHAN VIRODHI BHOKE JA AHE HE……SABHI NETA ,,,,,,,,,BJP ME CHALE GAYE HADDIYA CHAT RAHE HE ,,,,KOI LEDAR RAHA NAHI .,,,KIK KOI VIRODH NA KAR SAKE YE BAMAN BHAUT CHALAJ HE NAYE BUDDHIMAN LIDARO KO SAMNE LANA HOGA ,,,JO IMANDAR HO ,,,,KYA KOI HAME LEADER MILEGA ,,,YA FIR PURA MULNIVASI SAMAJ FIR SE GULAM BAN JAYEGA YE OG IS DESH KO HAMARE DESH KO BECHANE KE LIYE CHALE HE ,,,,,,,PRIVATIKARAN ISIKA NAM HE 4-5 BUISNESSMAN MILKE MILKE DESH KI MAHAGAYI BADHA RAHE HE ,,,,,KYA KISI KO AKAL NAHI RAHI,,,,,BHEDIYE DESH KHA RAHA HE…..JIN NETAWO NE DUSARI PARTIYO ME PREVASH KIYA UNKO CHARITR NAHI WO KISIKE NAHI ,,,UN PR KOI BAHISHKAR NAHI DALEGA TO …WO MURKH HE CHARITR HIN HE USE JINE KA KOI HQ NAHI ,,,,AWR WO BABASAHEBKE VICHAROPAR CHALNE WALA NAHI UN SABHI NETA WO PAR BAHISHKAR DALO ,,,,,AWR BABASAHEB KE ADARSHOPR CHALO,,,,,JAY BHIM

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