Indian Aboriginal


एक बड़ा सवाल तो यही है कि आखिर विकास की सारी विपदा आदिवासियों के हिस्से ही क्यों हैं? देश में साढे आठ करोड़ सूचीबद्ध आदिवासी हैं जबकि ढाई करोड़ गैर सूचीबद्ध (डिनोटीफाइड)हैं यानी कुल लगभग 11 करोड़ आदिवासी हैं. पर इन आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण है आदिवासियों का विस्थापन. जानकारों की मानें तो प्रत्येक दस में से एक आदिवासी आज वहां नहीं है, जहां वह पैदा हुआ था, जहां उसकी संस्कृति फल-फूल रही थी. आज क्यों न उसके पास अब जमीन है और न जंगल? पिछले एक दशक की ही बात लें तो औद्योगिक परियोजनाओं की स्थापना के कारण देश के महज चार राज्यों आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ, झारखंड और उडीसा में 14 लाख लोग विस्थापित हुये. इनमें 79 प्रतिशत लोग आदिवासी थे. तथ्य बताते हैं कि इस लोकतांत्रिक राष्ट्र में जनता के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाने वाली सरकार ने 66 प्रतिशत विस्थापितों का पुनर्वास तक नहीं किया और उन्हें उनके हाल पर जानवरों की तरह मरने-जीने के लिये छोड़ दिया.

aadivasiगरीबी, लाचारी और अभावों की दिशा में नया इतिहास गढ़ने वाले, छतीसगढ़ के जशपुर जिले ने देश को कई आईएएस, आईपीएस के साथ कई उच्चाधिकारी दिये हैं लेकिन इनकी ताकत भी जशपुर में कमजोर पड़ रही है. जशपुर के भूगर्भ में खनिज संपदाओं का विपुल भंडार तो है ही यहां की नदियों में प्राकृतिक स्वर्ण कण भी पाये जाते हैं. लेकिन प्रकृति की यह विरासत ही इन आदिवासियों के लिये मुश्किल का सबब बन गई है.

पिछले कुछ सालों से इस जिले में औद्योगिक घरानों ने अंधाधुंध तरीके से अपने विस्तार की तैयारी शुरु की है. यहां आने वाले 122 बड़े उद्योगों ने सरकार से उद्योगों की स्थापना के लिए 6023 वर्ग किलोमीटर जमीन की मांग की है. और जानते हैं, जिले का पूरा क्षेत्रफल कितना है ? कुल 6205 वर्ग किलोमीटर. यानी केवल 182 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र ऐसा है, जिसे औद्योगिक घराने बचे रहने देना चाह रहे हैं.

जाहिर है, जिले की लगभग साढ़े आठ लाख की आबादी के पास, ऐसी स्थिति में कई सवाल हैं. आखिर सब कुछ खाली हो जायेगा तो लोगों का क्या होगा ? लोग कहां जाएंगे ? खेती की जमीन छीन जायेगी तो खेती किसमें करेंगे और खायेंगे क्या ?

डा.एम.एम.स्वामीनाथन द्वारा तैयार ‘ड्राफ्ट पेपर’ में चौंकाने वाले तथ्य हैं. यह रिपोर्ट बताती है कि देश में औद्योगीकरण और विकास से संबंधित विभिन्न परियोजनाओं के कारण वर्ष 1990 तक की अवधि में जो आदिवासी विस्थापित हुए उनका पूरी तरह पुनर्वास नहीं हुआ. विस्थापित आदिवासियों की कुल संख्या 85.39 लाख रही, जो कुल विस्थापितों का 55.16 प्रतिशत थी. विस्थापित आदिवासियों में 64.23 प्रतिशत अब भी पुनर्वास से वंचित है और अपनी जमीन एवं जड़ से उखडे हैं.

ऐसे में भला छत्तीसगढ़ अलग कैसे होता ! छत्तीसगढ़ में भी सरकार उसी परंपरा के पालन की कोशिश कर रही है, जिसमें आदिवासियों की छाती पर उद्योग लगा कर कथित विकास की इबारत दर्ज की जाती है.
आदिवासियों का मृत्यु दर, देश के अन्य लोगो से ज्यादा क्यों है ? देश मे और गुजरात मे आदिवासियो का सरेराश आयु देश के अन्य समूहों से कम क्यों है ? 2008-09 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य अहेवाल के मुताबिक दर 1000 जन्मे बच्चों में से 1 से 5 सालकी आयुमे 145 बच्चे की मृत्यु होती है. जिसमे 81 यानी की 58% आदिवासी बच्चे होते क्यों होते है ? प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा या उच्च शिक्षा मे आदिवासी सब से पिछड़े क्यों है ?

राजस्थान हो, महाराष्ट्र हो, छतीसगढ़ हो, उड़ीसाः, गुजरात हो केन्द्र हो, वर्ग-1, वर्ग-2,वर्ग-3 या वर्ग-4 में एसटी आरक्षण के पद पर पर्याप्तं नियुक्ति एक भी सरकार ने क्यों नहीं की है ? आदिवासियों के लिए संविधान की 5-वी और 6 -वी सूचि के प्रावधान आदिवासी विस्तारों मे क्यों लागु नहीं किया गया ?
छतीसगढ़ मे आदिवासियों क्यों है बेहाल ? “मटन शाँप में जिस तरह बकरे कटे और लटकाये दिखते है. और कोई नही पुछता कि क्यो मारा इसे ? बस आज यही हाल है पुरे देश में आदिवासियों का है. बिजापुर में बीज पुजा के लिये जमा हुये आदिवासियो पर CRF के जवानों ने गोलीबारी कर आठ लोगो की हत्या की उस मेँ तीन मासुम बच्चे थे. लोग इतने डरे हुये थे कि लाशे महिलायें ढोके लाई है. एक भी अखबार या मिडिया के लिये ये बडी या छोटी खबर नही थी?

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2 Responses to Indian Aboriginal

  1. deependra singh says:

    true condition explain adivasiyo ki sach yahi h aaj aadivasi mukhya dhara s alag h maga govt unke vikas k liye koi rule sahi prakar s lagu nahi karti h unke jamin hathiyakar unhe berojgar bana rahi h

    • Shudra Sangh says:

      जब तक देश से ब्राह्मणवाद नाम का पूंजीवाद खत्म नहीं होगा.. तब तक आदिवासी समाज के लोग सुख से नहीं रह पाएंगे.. आदिवासियों की जमीने हडपना, जंगलों पर कब्ज़ा, गाँव से बाहर करना और आदिवासी लडकियों और औरतों पर अत्याचार सब ब्राह्मणवाद का ही हिस्सा है..

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