Sachin VS Bharat Ratan


बीते शनिवार को बेहद भावुक भाषण देकर (जिसे सुन पत्‍नी अंजली आंसू नहीं रोक पाई थीं) क्रिकेट से रिटायर हुए सचिन तेंडुलकर को भारत रत्न दिए जाने के फैसले पर बवाल बढ़ता जा रहा है। बिहार में मुजफ्फरपुर की स्‍थानीय अदालत में इस मामले में याचिका दायर कर सचिन को भारत रत्‍न दिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। इसमें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे और खेलमंत्री जितेंद्र सिंह पर आरोप लगाए गए हैं। सचिन पर भी धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। याचिका स्थानीय वकील सुधीर sachin1 copyकुमार झा ने लगाई है। इसमें कहा गया है कि देश के सर्वोच्च सम्मान के लिए हॉकी के जादूगर ध्यानचंद से पहले सचिन का चयन करने से लोग आहत हुए हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 10 दिसंबर को होगी। सुधीर ने जदयू नेता शिवानंद तिवारी को मामले में गवाह बनाया है।
सचिन देश के पहले खिलाड़ी हैं, जिन्हें देश के सबसे ऊंचे नागरिक सम्मान यानी भारत रत्न से नवाजा जाएगा। यह खबर सुन कर सचिन नि:शब्‍द हो गए थे और पत्‍नी अंजली तो खुशी से उछल पड़ी थीं। सचिन का बतौर क्रिकेटर कद देश के किसी भी अन्य खिलाड़ी से कहीं ऊपर है। इसके लिए वे हम सभी की ओर से हमेशा ही सम्मान के हकदार रहेंगे। लेकिन जो पुरस्कार राष्ट्रपिता कहे जाने वाले महात्मा गांधी को नहीं मिला, वह सचिन तेंडुलकर जैसे खिलाड़ी को दिए जाने के ऐलान से कई तरह के सवाल भी खड़े हो गए हैं। ये सवाल सचिन और बीसीसीआई द्वारा पहले किए गए कबूलनामे और हरकतों की वजह से भी उठ रहे हैं।

सचिन को बतौर क्रिकेटर ‘भारत रत्‍न’ दिया गया है, लेकिन सचिन ने इनकम टैक्‍स विभाग को बताया था कि वह मुख्‍य रूप से बतौर एक्‍टर कमाई करते हैं और इस आधार पर उन्‍होंने आयकर में छूट भी हासिल की थी। यही नहीं, बीसीसीआई सुप्रीम कोर्ट में कह चुका है कि वह एक निजी संस्‍था है और उसके द्वारा चुने गए खिलाड़ी देश के लिए नहीं, बल्कि उसकी ओर से खेलते हैं। सचिन ने इंटरनेशनल क्रिकेट के मैदान से विदाई के वक्त अपनी पूर्व और मौजूदा फर्म को याद किया जो उनके व्यवसायिक हितों की रक्षा करती रही है। ऐसा करते हुए सचिन भावुक भी हो गए थे इन परिस्थितियों में सवाल उठता है कि क्‍या सचिन ने देश की वाकई सेवा की है? क्या सचिन ने अपने खेल के एवज में सैकड़ों करोड़ रुपए नहीं कमाए हैं? क्या उनके खेल से भारतवासियों के जीवन में कोई असरदार सकारात्मक बदलाव आया है? और भी कई सवाल हैं, जो सचिन को भारत रत्न दिए जाने के फैसले को कठघरे में खड़ा करते हैं।

सचिन तेंडुलकर को भारत रत्न दिए जाने को लेकर सरकार का कहना है कि यह पुरस्कार क्रिकेट में उनके योगदान को देखते हुए दिया गया है। लेकिन सवाल उठता है कि सचिन किसके लिए खेलते हैं? क्या वे देश के लिए खेलते हैं? जवाब है-नहीं। वे बीसीसीआई के खेलते हैं। बीसीसीआई ने कोर्ट में हलफनामा देकर कई बार साफ किया है कि वह एक प्राइवेट संस्था है और उसकी टीम भारत का आधिकारिक तौर पर प्रतिनिधित्व नहीं करती है।

दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई सुप्रीम कोर्ट के सामने कई बार कह चुका है कि वह एक प्राइवेट बॉडी है। हलफनामे के मुताबिक बीसीसीआई तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है और इस पर सरकार की ओर से बनाए गए नियम कानून लागू नहीं होते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि खेल के नियम, सेलेक्शन, मैदान का चुनाव और इकट्ठा की गई रकम के इस्तेमाल को लेकर देश के आम लोग कोर्ट के सामने कभी सवाल नहीं उठा पाएंगे।

सचिन एक प्राइवेट संस्था के लिए जीवन भर खेलते रहे जिसका एकमात्र उद्देश्य खजाना भरना था और इसकी अगुवाई कारोबारी और राजनेता करते रहे हैं। भले ही सचिन यह कहते हों, हम सभी भाग्यशाली हैं कि हमें देश की सेवा करने का मौका मिला। लेकिन क्या बीसीसीआई का हलफनामा सचिन की बात को झूठ नहीं साबित करता है?

 

सचिन तेंडुलकर ने अपने 200 वें और आखिरी टेस्ट मैच के खत्म होने पर कहा था कि वे खुद भाग्यशाली मानते हैं कि उन्होंने देश की सेवा की है। लेकिन कुछ साल पहले 2 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स बचाने के लिए सचिन ने खुद को क्रिकेटर नहीं बल्कि अभिनेता बताया था। दरअसल, नाटककार, संगीतकार, अभिनेता और खिलाड़ियों को सेक्शन 80 आरआर के तहत आयकर में छूट मिलती है। सचिन का कहना था कि वे पेशेवर क्रिकेटर नहीं हैं। उन्होंने अपने पेशे के बारे में बताया था कि वे एक्टर हैं। क्रिकेट से हुई कमाई को उन्होंने आय के अन्य साधनों में दिखाया था। इस पर आयकर विभाग के अधिकारी ने कहा था कि अगर आप क्रिकेटर नहीं हैं, तो आखिर कौन क्रिकेटर है?

दरअसल, सचिन को 2001-02 और 2004-05 के बीच ईएसपीएन स्टार स्पोर्ट्स, पेप्सीको और वीजा के जरिए 5,92,31,211 रुपए की कमाई पर 2,08,59,707 रुपए आयकर देना था। लेकिन सचिन ने इनकम टैक्स कमिश्नर के दावे को चुनौती दी थी। जिसके बाद ट्राइब्यूनल ने अपने फैसले में कहा था कि कोई व्यक्ति दो पेशे में भी हो सकता है और वह दोनों पेशे के तहत आयकर में छूट की मांग कर सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि जो व्यक्ति सिर्फ आयकर बचाने के लिए खुद को क्रिकेटर नहीं बल्कि एक्टर बताने लगे, क्या वह भारत रत्न का हकदार हो सकता है? जबकि सचिन ने संन्यास के वक्त कहा था कि वे क्रिकेट के बिना जीवन की कल्पना तक नहीं कर सकते। सरकार ने भी उनके नाम का ऐलान करते वक्त बतौर क्रिकेटर उनके योगदान को ही भारत रत्न का आधार माना था। सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया था, ‘सचिन तेंडुलकर निस्संदेह शानदार क्रिकेटर हैं। एक ऐसे लीजेंड खिलाड़ी जिसने पूरी दुनिया में लाखों लोगों को प्रेरित किया। 16 साल की उम्र से तेंदुलकर ने 24 वर्षों तक देश के लिए क्रिकेट खेला है। खेल जगत में वो भारत के सच्चे अंबेसडर रहे हैं। उनके द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड्स अद्वितीय हैं।’ लेकिन विडंबना है कि सचिन खुद को क्रिकेटर नहीं मानते।

 

फरारी से मुनाफाखोरी?

सचिन तेंडुलकर के साथ कई विवाद भी जुड़े हुए हैं। इनमें फरारी तोहफे में लेने और बाद में उसे बेचकर मुनाफा कमाने का मामला अहम है। फिएट कंपनी ने मशहूर फॉर्मूल वन कार ड्राइवर माइकल शूमाकर के हाथों सचिन को डॉन ब्रेडमैन की 29 शतक लगाने के रिकॉर्ड की बराबरी करने पर फरारी-360 मॉडेनो कार तोहफे में दिलवाई थी। लेकिन यह मामला तब विवादों में घिर गया जब सचिन ने 1.13 करोड़ रुपए की इंपोर्ट ड्यूटी से छूट की मांग की। इसे माफ भी कर दिया गया। लेकिन दिल्ली कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने केंद्र सरकार और सचिन को नोटिस जारी किया। विवाद बढ़ता देख फिएट कंपनी ने खुद इंपोर्ट ड्यूटी चुकाना अच्छा समझा। लेकिन सचिन ने कुछ समय बाद यह कार सूरत के एक कारोबारी को बेच दी। महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर कहा था, जब सचिन को फरारी गिफ्ट के रूप में चाहिए थी, तब उन्होंने इंपोर्ट ड्यूटी से छूट मांगी थी, लेकिन अब जब उन्होंने कार बेच दी है, तो क्या उनसे मुनाफे पर टैक्स मांगा जाएगा?

 

 

सरकार ने सचिन से बेहतर ध्यानचंद को माना था, फिर भी किए गए दरकिनार

केंद्र सरकार ने 82 सांसदों, यूपीए सरकार के कुछ मंत्रियों और खेल मंत्रालय की सिफारिश को दरकिनार करते हुए ध्यानचंद को भारत रत्न सम्मान से इस साल नहीं नवाजा है। केंद्रीय खेल मंत्रालय ने इस वर्ष अगस्त में सरकार को सिफारिश की थी कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न दिया जाए। केंद्रीय खेल मंत्री जितेंद्र सिंह ने संसद के मॉनसून सत्र में इस बात की जानकारी दी थी। खेल मंत्रालय ने अपनी सिफारिश में कहा था कि वह स्वर्गीय ध्यानचंद को सचिन के ऊपर प्राथमिकता देते हुए उन्हें भारत रत्न देने के लिए सिफारिश कर रहा है। खेल मंत्रालय ने उस समय अपनी सिफारिश में कहा था कि भारत रत्न के लिए एकमात्र पसंद ध्यानचंद ही हैं। मंत्रालय ने कहा था कि हमें भारत रत्न के लिए एक नाम देना था और हमने ध्यानचंद का नाम दिया है। सचिन के लिए हम गहरा सम्मान रखते हैं लेकिन ध्यानचंद भारतीय खेलों के लीजेंड हैं इसलिये यह तर्कसंगत बनता है कि ध्यानचंद को ही भारत रत्न दिया जाए क्योंकि उनके नाम पर अनेक ट्रॉफियां दी जाती हैं।

ध्यानचंद को आधुनिक भारतीय खेलों का सुपरस्टार माना जाता है। वे 1948 में रिटायर हो गए थे। सरकार ने उन्हें 1956 में पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा था। सचिन की तुलना जिस महान बल्लेबाज सर डॉन ब्रेडमैन से की जाती है, उसी ब्रेडमैन ने 1935 में एडिलेड में ध्यानचंद के खेल को देखकर कहा था, ‘ये क्रिकेट के खेल में जैसे रन बनाए जाते हैं, वैसे ही गोल करते हैं।’ कहा जाता है कि बर्लिन में 1936 में उनके खेल को देखकर हिटलर खुद को रोक नहीं पाया था और उन्हें जर्मन सेना में कर्नल का पद देने की पेशकश कर डाली थी, जिसे ध्यानचंद ने ठुकरा दिया था। दिसंबर, 2011 में 82 सासंदों के अलावा यूपीए सरकार के कई मंत्रियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय को चिट्ठी लिखकर ध्यानचंद को भारत रत्न दिए जाने की मांग की थी।

विश्वनाथन आनंद, लिएंडर पेस भी दरकिनार

शतरंज की दुनिया के बड़े नाम विश्वनाथन आनंद और टेनिस के शानदार खिलाड़ी लिएंडर पेस को भी अब तक भारत रत्न जैसा पुरस्कार नहीं मिला है। आनंद ने वर्ल्ड चैंपियनशिप पांच बार और चेस ऑस्कर छह बार जीता है। तेंडुलकर से तीन साल बड़े आनंद भारत के एकमात्र शतरंज खिलाड़ी हैं, जिन्होंने सभी फॉर्मेट-टूर्नामेंट, मैच, नॉकआउट और रैपिड में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती है। वहीं, लिएंडर पेस सचिन से कुछ हफ्ते छोटे हैं। डेविस कप में लिएंडर का रिकॉर्ड जोरदार है। उन्होंने हेनरी लेकॉन्ते, गोरान इवनसेविच, वेन फरेरा और जेरी नोवाक जैसे खिलाड़ियों को डेविस कप में हराया है। 1996 में वे अटलांटा ओलिंपिक के सेमीफाइनल तक पहुंचे थे और उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था। पेस सबसे ज्यादा उम्र में ग्रैंडस्लैम जीतने वाले खिलाड़ी भी हैं। इन दोनों खिलाड़ियों को सचिन से पहले अर्जुन अवॉर्ड मिला था। आनंद देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार यानी राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित होने वाले पहले खिलाड़ी हैं। लेकिन इन दोनों महान खिलाड़ियों को भारत रत्न के काबिल नहीं समझा गया।

 

भारत रत्न के लिए सचिन तेंडुलकर के नाम का एलान हो गया है। लेकिन टीवी, प्रिंट और रेडियो में वे कई कमर्शियल प्रॉडक्ट का प्रचार कर रहे हैं। क्या भारत रत्न पुरस्कार के लिए चुने गए शख्स को ऐसा करना शोभा देता है? क्या वह व्यवसायिक हितों के लिए किसी खास प्रोडक्ट का प्रचार कर सकता है? लेकिन सचिन ऐसा कर रहे हैं। क्या यह भारत रत्न जैसे सम्मान का अपमान नहीं है? 2014 तक सचिन के साथ प्रचार के लिए कई कंपनियों के करार हैं। क्या सरकार इन करारों की अवधि के बारे में जानती है? अगर उसे इसके बारे में पता है तो उसने इंतजार क्यों नहीं किया? क्या सचिन से अपने प्रोडक्ट के लिए प्रचार कराने वाले कारोबारी घराने उन्हें मिलने जा रहे भारत रत्न जैसे पुरस्कार का परोक्ष रूप से मुनाफा कमाने के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे? अगर ऐसा हो रहा है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है? सरकार या सचिन?

 

विज्ञापन को लेकर भी विवादों के घेरे में रहे हैं सचिन

इस देश में सचिन की ब्रैंड वैल्यू कितनी है, इसका अंदाजा सभी को है। सचिन जब कोई बात कहते हैं तो लोग सुनते हैं और मानते हैं। ऐसे में जब वे किसी प्रोडक्ट के बारे में प्रचार करते हैं, तो उसका लोगों पर काफी असर हो सकता है। क्या इस बात के मद्देनजर सचिन को प्रोडक्ट का प्रचार करने का फैसला लेने से पहले उसकी विश्वसनीयता के बारे में नहीं सोचना चाहिए? लेकिन शायद सचिन ने इस बारे में सोचना लाजिमी नहीं समझा। तेंडुलकर सहारा इंडिया परिवार के क्यू शॉप विज्ञापन में अन्य क्रिकेटरों के साथ नजर आते हैं। सचिन पिछले साल सहारा के क्यू शॉप के विज्ञापन में अंतिम संस्कार करते हुए नजर आए थे। विज्ञापन की खराब विषय वस्तु की तीखी आलोचना हुई और उसके फिल्मांकन पर सवाल उठे। इस बारे में बीसीसीआई को शिकायतें मिलीं। यह विज्ञापन तब सामने आया था जब बाजार नियामक सेबी ने गैरकानूनी तरीके से पैसे इकट्ठा करने को लेकर सहारा इंडिया परिवार की खिंचाई की थी। सेबी ने विज्ञापनों में सार्वजनिक अपील की थी कि लोग क्यू शॉप में निवेश न करें। लेकिन इसके बावजूद सचिन समेत देश के कई क्रिकेटर क्यू शॉप का विज्ञापन करते रहे। क्यू शॉप कानूनी पचड़े में भी फंस चुका है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने क्यू शॉप के खिलाफ आदेश दिया था। सेबी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को बताया था कि वह क्यू शॉप की गैरकानूनी गतिविधियों की जांच कर रहा है। उत्तराखंड सरकार ने क्यू शॉप विज्ञापनों पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

भारत रत्न यानी फायदे ही फायदे

भारत रत्न सिर्फ एक मेडल या प्रशस्ति पत्र नहीं है। इसके साथ शानदार आर्थिक फायदे भी जुड़े हैं। नियमों के मुताबिक भारत रत्न पुरस्कार जीतने वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री के वेतन के बराबर या आधी राशि बतौर पेंशन दी जाती है। भारत रत्न पाने वाला शख्स भारत में कहीं भी विमान और रेल में फर्स्ट क्लास की यात्रा मुफ्त कर सकता है। उसे जरुरत पड़ने पर जेड श्रेणी की सुरक्षा दी जा सकती है। उसके किसी रिश्तेदार को सरकारी नौकरी दी जा सकती है। स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस समारोह में वह व्यक्ति विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित होता है।

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