Kunti Ka Sach


आओ मित्रो आज हम जानते है कि बिना प्रसव पाण्डवो का जन्म कैसे हुआ ।
एक दिन पाण्डुराजा अपनी दोनो पत्नियों कुन्ती और माद्री के साथ हिमालय पर शिकार करने जाते है तभी जंगल मे उन्हे एक हिरण ओर हिरणी दिखाई देते है पाण्डु राजा उस हिरण को अपने बाण से घायल कर देते है लेकीन वो हिरण वास्तव मे कोइ हिरण ना हो कर करदम नामक ऋषी थे जो हिरण के रुप मे अपनी पत्नी से पेम वार्तालाप कर रहे होते है ।
जब पाण्डु राजा उस हिरण के पास जाते है तो ऋषी अपने असली रुप मे आकर उन्हे श्राप देते है कि जो हाल तुमने मेरा किया है तुम्हारा भी वही हाल होगा और ऋषी की मौत हो जाती है । इस हादसे के बाद पाण्डु राजा बहुत परेशानी मे रहने लगते है और फिर वो निश्चय करते है कि अब वे दुनिया से सन्यास लेकर अपने बाकी का जीवन यही हिमालय पर तपस्या करते हुए बिताएंगे । kuntiपाण्डूराजा अपनी दोनों पत्नियों को वापस जाने को कह्ते है लेकिन उनकी दोनो पत्नियाँ भी वन मे रहकर उनके साथ तप्सया करने का निश्चय करती है । इस तरह पाण्डु राजा अपनी दोनों पत्नियों के साथ रहकर हिमालय के वन मे तपस्या करने मे लग जाते है लेकिन फिर भी उनका उनके मन को शांति नही मिलती है पाण्डू अपनी पत्नियों से कहते है कि हमारी इतनी तपस्या करने बाद भी हमारी कोइ संतान नही है हमारा वंश एसे ही समाप्त हो जायेगा ये सोचकर वो बहुत दुखे होते है । तभी पाण्डु की पत्नी कुन्ती पाण्डु से कहती है कि उसने पिछले जन्म मे दुर्वासा नाम के एक ऋषि की खुब सेवा की थी जिससे प्रसंन होकर दुर्वासा ऋषि ने कुन्ती को वरदान के रुप म एक मंत्र दिया था जिसका उच्चारण कर कुन्ती किसी भी देवता को बुला सक्ती है और वो देवता उसे वरदान मे एक पुत्र देंगे । कुन्ती पाण्डु से कहती है कि मै मंत्रोच्चारण करती हूँ, लेकिन आपके किस ईष्टदेव को बुलाना है ये आप बताइये । तभी कुन्ती मंत्र का उच्चारण कर यमराज को बुलाती है, यमराज प्रकट होते है और कुन्ती को युधीष्ठीर नामक पुत्र देते है । फिर कुन्ती और पाण्डु पवन देव को बुलाते है पवन देव प्रकट होते है और वो कुन्ती को भीम नामक पुत्र देते है । इसके बाद इन्द्रेव को बुलाते है और इन्द्रेव उन्हे अर्जुन नामक पुत्र देते है । इसके बाद कुन्ती रानी मादरी को अश्वीनी कुमारो का मंत्र जाप करने को कहती है, अश्वीनी कुमार प्रकट होते है और वो उन्हे नुकुल और सहदेव नामक दो पुत्र देते है ।
इस प्रकार बिना किसी महीला के गर्भवती हुए और बिना प्रसव के पाच पाण्ड्वो का जन्म होता है । लेकिन इस मिथ्या पूर्ण गप्पे या कहानी को सुनने के बाद निम्नलिखीत सवाल उठते है:
1:- वो ऋषी करदम हिरण के रुप मे क्यो अपनी पत्नी के साथ प्रेम वार्तालाप कर रहे थे, इन्सान बने रहने मे क्या दिक्कत थी ? पाण्डुराजा इन्सान होते हुए भी धोखा खा गये अगर कोई शेर या जंगली जानवर उनका शिकार कर लेता तो को उसे कौन सा श्राप देते ?
2:- और पाण्डुराजा तो सन्यास लेकर वन मे अकेले अपना जीवन बिताना चाहते थे वो तो दोनों रानियाँ अपनी जिद से उनके साथ वन मे रुक गयी, तो फिर सन्यास लेने के बाद संतान की चाह क्यो?
3:- तपस्या करने का संतान प्राप्ति से क्या संबध? पाण्डुराजा तो अकेले ही जंगल मे रुकना चाहते थे अगर दोनों रानियाँ उन्हे छोडकर वापस अपने महल मे चली गयी होती तो क्या फिर भी पाण्डु संतान होने की अभिलाषा रखते और अपने वंश की चिंता करते ?
4:- कुन्ती ने भे कहानी मे जबरजस्त ट्वीस्ट ला दिया कहती है की उसके पास पिछले जन्म का वरदान है, अरे भाई पिछले दिन की बाते याद नही रहती तो फिर पिछ्ले जन्म का वरदान कैसे याद रहगया, और भी वरदान कि भी तो कोइ टर्म या कंडीशन रही होगी कि कि इसकी वैध्यता इसी जन्म की है?
5:- पांचो बच्चे देवताओ ने सीधे कुन्ती को दिये थे तो फिर पाण्डु पाण्डवो के पिता कैसे कहलाये?

अब आप लोगों को सच बता देते है की आखिर हुआ क्या था.. पांडू नंपुसक हो गया था. उसके कोई भी औलाद नहीं हो सकती थी. पांडू बच्चे पैदा नहीं कर सकता था.. तो उस समय ब्राहमणों, राजपूतों में “नियोग विधि” प्रचलति थी.. जिस के अनुसार कोई भी ब्राह्मण, राजपूत या वैश्य औरत किसी दुसरे मर्द के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना कर बच्चे पैदा कर सकती थी.. महाभारत से पहले यही विधि राम को पैदा करने के लिए प्रयोग की गई थी.. दशरथ भी नंपुसक था.. वो कोई भी बच्चा पैदा नहीं कर सकता था.. तो उसने यज्ञ के नाम पर अपनी तीनों रानियाँ अपने तीन पुरोहितों को दी और राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न पैदा हुए थे.. ठीक वही विधि कुंती ने प्रयोग में लाई.. उसने पहले सूर्य के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना कर कर्ण नाम का बच्चा पैदा किया था.. लेकिन लोक लाज के भय से उसको नदी में बहा दिया था.. इस कहानी में पिछले जन्म और दुर्वासा की कथा व्यर्थ ही जोड़ी गई है.. सच यहाँ था कि पहले कुंती ने यमराज नाम के आदमी से शारीरिक सम्बन्ध बनाये.. फिर पवन देव नाम के आदमी से शारीरिक सम्बन्ध बनाये.. उसके बाद ब्राह्मणों के सेना पति जिसको कालांतर में इंद्र कहा जाता था. उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये.. और तीन पुत्रों को जनम दिया…
अब कुंती का चरित्र तो देखो.. खुद तो वह एक नीच औरत बन चुकी थी.. पांडू की दूसरी पत्नी के चरित्र हनन के लिए भी कुंती ही जिमेवार है.. उसी ने माद्री को दुसरे मर्दों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने के लिए उकसाया.. और तब माद्री ने अश्वनी कुमार नाम के आदमी से शारीरिक सम्बन्ध बनाये.. और दो पुत्रों की माता बनी…
शायद आप लोगों को पता ही होगा कि कुंती, कृष्ण की बुआ थी.. तो यहाँ यह बात भी सिद्ध हो जाती है.. कि सिर्फ कुंती ही चरित्रहीन नहीं थी.. कृष्ण भी चरित्र हीन था.. जो कुवारी कन्याओं को तालाब पर नहाते हुए देखता था.. कन्याओं के कपडे उठा कर उनको तालाब से बाहर आने पर विविश करता था.. गाँव की सभी औरतों के साथ उसके शारीरिक सम्बन्ध थे.. जिस से दुखी होकर नन्द गाँव के लोगों ने कृष्ण और उसके भाई को गाँव से बाहर निकल दिया.. और कृष्ण ने मथुरा के राजा को धोखे से मार कर वह अपनी राजधानी बसाई… अब आप ही बताओ.. इतनी नीच कुल में पैदा हुआ कृष्ण भगवान् और कुंती देवी कहलाने योग्य है या नहीं?

Advertisements

About Bheem Sangh

Visit us at; http://BheemSangh.wordpress.com
This entry was posted in Scriptures and tagged . Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s