Atharvaveda Ka Sach


वेदों में दुनिया भर की अश्लील बातों और रीती रिवाजों के सिवा कुछ भी नहीं है.. किसी वेद में इंसानों को जाति, धर्म या पंथ के नाम पर बांटा गया है.. तो किसी में औरत और मर्द के नाम पर सामाजिक बुराइयों को प्रोत्साहित किया गया है… चारों वेद सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मणों की ऐयाशी और वासना को बढ़ावा देते है… आज हम आपको चरों वेदों में से अथर्ववेद की सचाई बताने जा रहे है… आप भी ये सच्चाई जानो और मूलनिवासी समाज के हर आदमी तक ये सच्चाई पहुचाओ.. ताकि मूलनिवासी समाज के लोग सच को समझे और देश को ब्राह्मणवाद मुक्त बनाने में सहयोग दे…
athrvved ka sachअथर्ववेद – अश्लीलता के कुछ नमून अब जिक्र करते है अश्लीलता का
:- वेदों में कैसी- कैसी अश्लील बातें भरी पड़ी है, इसके कुछनमूने आगे प्रस्तुत किये जाते हैं:
(१) यां त्वा ………शेपहर्श्नीम ||(अथर्व वेद ४-४-१)
अर्थ : हे जड़ी-बूटी, मैं तुम्हें खोदता हूँ. तुम मेरे लिंगको उसी प्रकार उतेजित करो जिस प्रकार तुम नेनपुंसक वरुण के लिंग को उत्तेजित किया था.
(२) अद्द्यागने……………………….पसा:||(अथर्व वेद ४-४-६)
अर्थ: हे अग्नि देव, हे सविता, हे सरस्वती देवी, तुम इसआदमी के लिंग को इस तरह तान दो जैसे धनुषकी डोरी तनी रहती है
(३) अश्वस्या……………………….तनुवशिन ||(अथर्व वेद ४-४-८)
अर्थ : हे देवताओं, इस आदमी केलिंग में घोड़े, घोड़े के युवा बच्चे, बकरे, बैल और मेढ़े केलिंग के सामान शक्ति दो
(४) आहं तनोमि ते पासो अधि ज्यामिव धनवानी,क्रमस्वर्श इव रोहितमावग्लायता(अथर्व वेद ६-१०१-३)
मैं तुम्हारे लिंग को धनुष की डोरी के समान तानता हूँताकि तुम स्त्रियों में प्रचंड विहार कर सको.
(५) तां पूष………………………शेष:|| (अथर्व वेद १४-२-३८)
अर्थ : हे पूषा, इस कल्याणी औरतको प्रेरित करो ताकि वह अपनी जंघाओं को फैलाएऔरहम उनमें लिंग से प्रहार करें.
(६) एयमगन………………..सहागमम || (अथर्व वेद २-३०-५)
अर्थ : इस औरत को पति की लालसा है और मुझेपत्नी की लालसा है. मैं इसके साथ कामुक घोड़े की तरहमैथुन करने के लिए यहाँ आया हूँ.
(७) वित्तौ………………………..गूहसि (अथर्व वेद २०/१३३)
अर्थात : हे लड़की, तुम्हारे स्तन विकसित हो गए है. अबतुम छोटी नहीं हो, जैसे कि तुम अपने आपको समझती हो। इन स्तनों को पुरुष मसलते हैं।तुम्हारी माँ ने अपने स्तन पुरुषों से नहीं मसलवाये थे, अत: वेढीले पड़ गए है। क्या तू ऐसे बाज नहीं आएगी? तुम चाहो तो बैठ सकती हो, चाहो तो लेट सकती हो.

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