Rigved Ka Paishachik Sach


ब्राह्मण ख़ून और मांस के कितने भूखे होते है.. इस के प्रमाण ऋग्वेद में मिलते है.. ये ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य पुरे पिशाच है.. वैम्पायर से भी खतरनाक.. बस मांस और खून के सिवा इनको कुछ भी नहीं चाहिए.. अभी नवरात्रों के नाम पर झूठे ढोंग और पाखंड कर के लाखों पशुओं को मारा जायेगा.. हजारों आदमियों को धर्म के नाम पर काटा जायेगा.. कौन कहता है ब्राह्मण गौ-मांस नहीं खाता? ये देखो ऋग्वेद के कुछ श्लोकों के अर्थ:
1- जिन घोड़ो को अग्नि मे बली दी जाती है ,जो जल पिता है जिसके ऊपर सोमरस रहता है ,जो यज्ञ का अनुष्ठाता है ,उसकी एवम उस अग्नि को मै प्रणाम करता हु। ( ऋग्वेद 10,91,14)
169693इंद्रा कहते है ,इंद्राणी के द्वारा प्रेरित किए गए यागिक लोग 15-20 सांड काटते और पकाते है । मै उन्हे खाकर मोटा होता हू । -ऋग्वेद 10,83,14
3- जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बली दिया करती है ,जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है ,हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्छेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ मे भेज दे । – ऋग्वेद 10,16,92
4- हे दिव्य बधिको!अपना कार्य आरंभ करो और तुम जो मानवीय बधिक हो ,वह भी पशु के चरो और आग घूमा चुकाने के बाद पशु पुरोहित को सौप दो। (एतरे ब्राह्मण )
5*-*****एतद उह व परम अन्नधम यात मांसम। ( सत्पथ ब्राह्मण11,4,1,3)
अर्थ ;- सटपथ ब्राह्मण कहता है, की जीतने भी प्रकार के खाद्द अन्न है ,उन सब मे मांस सर्वोतम है

महर्षि याज्यावल्क्या ने षत्पथ ब्राह्मण (3/1/2/21) में कहा हैं कि: -”मैं गोमांस ख़ाता हू, क्योंकि यह बहुत नरम और स्वादिष्ट है.”
आपास्तंब गृहसूत्रां Apastamb Grihsutram (1/3/10) मे कहा गया हैं,”गाय एक अतिथि के आगमन पर, पूर्वजों की’श्रद्धा’के अवसर पर और शादी के अवसर पर बलि किया जाना चाहिए.” ऋग्वेद (10/85/13) मे घोषित किया गया है,”एक लड़की की शादी के अवसर पर बैलों और गायों की बलि की जाती हैं.”
पिबा सोममभि यमुग्र तर्द ऊर्वं गव्यं महि गर्णानैन्द्र
वि यो धर्ष्णो वधिषो वज्रहस्त विश्वा वर्त्रममित्रिया शवोभिः ||
वशिष्ठ धर्मसुत्रा (11/34) लिखा हैं,”अगर एक ब्राह्मण’श्रद्धा’या पूजा के अवसर पर उसे प्रस्तुत किया गया मांस खाने से मना कर देता है, तो वह नरक में जाता है.”पिबा सोममभि यमुग्र तर्द ऊर्वं
गव्यं महि गर्णानैन्द्र | वि यो धर्ष्णो वधिषो वज्रहस्त विश्वा वर्त्रममित्रिया शवोभिः || वशिष्ठ धर्मसुत्रा (11/34) लिखा हैं,”अगर एक ब्राह्मण’श्रद्धा’या पूजा के अवसर पर उसे प्रस्तुत किया गया मांस खाने से मना कर देता है, तो वह नरक में जाता है.”
हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रचारक स्वामी विवेकानंद ने इस प्रकार कहा:”तुम्हें जान कर आश्चर्या होगा है कि प्राचीन हिंदू संस्कार और अनुष्ठानों के अनुसार, एक आदमी एक अच्छा हिंदू नही हो सकता जो गोमांस नहीं खाए. (The Complete Works of Swami Vivekanand, volume.3, page no. 536) .

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