Gandhi Ka Sach


“मूहं में राम बगल में छुरी” जैसे इंसान को महात्मा कहा जा सकता है तो तो गांधी महात्मा है। मैं तमाम महात्माओं से नफरत करता हूँ और मेरा दृढ़ विशवास है की उन्हें पूरी तरह से नकार दिया जाय। मेरा यह मत है की उनका अस्तित्व उस देश पर कलंक जैसा है जिस देश में वो पैदा हुए है। वे लोग अंधश्रद्धा फैलाकर बुद्धि और तर्क का विनाश करते है। आचार्य, साधू, संत इत्यादि के खिलाफ आरोप किया जाता है की इनका जीवन व्यर्थ है क्यों की उन्होंने देश की उन्नति के लिए कुछ भी नहीं किया। सत्य को सबूतों के आधार पर ही परखा जाता है। ambedkar3संत, साधुओं से बहस करना संभव था, लेकिन गाँधी के साथ ऐसा करना भी संभव नहीं है। यह अफ़सोस जनक है की यह महात्मा जैसा कहे वेही सच मानना पड़ता है। (बौद्धिक) अत्म्समरण सबसे बड़ी विपदा है क्यों की वह मानसिक गुलामी है जिसमे फसने के बाद इंसान की हर उन्नति रुक जाती है। महत्मगिरी से लोग गुलाम बन जाते है। लोगों को गुलामी से बचाना है तो सबसे पहले महात्मागिरी को ख़तम करना पड़ेगा। लोग बेवकूफ हो तभी महात्मागिरी चल सकती है। इस देश में महात्मा पैदा होना मैं सबसे बड़ी विपदा मानता हूँ। जिस दिन गाँधी को महात्मा कहा गया वह दिन देश के इतिहास का सबसे अफसोसनाक और जिसने गाँधी को यह पदवी दी है वह सबसे बड़ा खलनायक समझा जाना चाहिए।
(Dr. Babasaheb Ambedkar : Writings & Speeches : Volume 17-II, Page No.66-68)

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2 Responses to Gandhi Ka Sach

  1. GULSHAN says:

    yes

    • azad says:

      to fir Dr. Bim Rao kon hai….. Tik Kaha kisi ki apni Maa ko koi Dakan nahi bata…. sahi ja rahe ho miya…

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