Castesim In India


बाबा साहब अम्बेडकर के अनुसार भारत में जाति प्रथा नहीं थी. सब लोग मिलजुल कर रहते थे. जिन में यक्ष, किन्नर, रूद्र आदि लोग थे. सब के सब अपने अपने कामकाजों में व्यस्त रहते थे. सब एक दुसरे की भलाई में लगे रहते थे. सब एक दुसरे के घरो में आते जाते थे. आप लोगों ने शास्त्रों कर्मकांडो कि किताबों में पढ़ा ही होगा. शिव को कोई परेशानी होती तो विष्णु आके समस्या का निदान करते थे. हमारे राजाओं को कोई परेशानी होती थी तो सब एक दुसरे कि मदद करते थे. शिव आदि रुद्रों ने हमेशा समाज कल्याण के ही कार्य किये.

सवाल यह है कि जाति प्रथा हमारे समाज में आई कैसे? हमारा समाज क्यों विभाजित हुआ? आखिर ऐसा क्या हुआ कि दुनिया की श्रेष्ठ जातियों को अछूत करार दे दिया गया? इस का उत्तर सीधा सा है, जब ये ब्राहमण लोग भारत में आये. तो इन लोगों को यहाँ के लोगों से जलन हो गई कि हम लोग तो इन भारतवासियों से बहुत पीछे है. हमे तो कुछ आता ही नहीं है. ये भारत के स्थाई निवासी तो बहुत ज्यादा उन्नत है. सब के सब अलग अलग जाति के होते हुए भी आपस में मिल जुल कर रहते है. फिर इन लोगों ने हमारे समाज को तोड़ने की कोशिशे शुरू कर दी. इस बात के प्रमाण आज भी आप लोगों को देखने को मिल जायेंगे. चमार मंदिरों के बाहर खड़े होंगे. बाजा बजाने वाले मंदिर के दरवाजे के तो अन्दर होंगे लेकिन दरवाजे से आगे नहीं बढ़ेंगे. कुछ लोग उसे भी आगे जा सकते है लेकिन मुख्य कक्ष में नहीं जायेंगे. मुख्य कक्ष में कौन जायेगा? सिर्फ ब्राह्मण. लेकिन क्यों? ये कोई नहीं जानता.

ब्राह्मणों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से जातियों को बनाया. इन तथाकथित ब्राह्मणों को तो आराम चाहिए था. मुफ्त में ऐश करने को मिलनी चाहिए थी.

ambedkar2चमार जाति कैसे बनी? ब्राह्मणों ने हमारे देश के कुछ लोगों पर झूठे आरोप लगा कर समाज से बाहर के दिया. खाने पीने के नाम पर कुछ नहीं दिया. बहिष्कृत कर दिया मनमाने अत्याचार किये. अब आप लोग ही बताओ जिस आदमी को सभ्य समाज में रहने की आदत हो. वो आदमी अगर समाज से बाहर कर दिया जाये तो वो क्या करेगा? क्या खायेगा? कहा जायेगा? मजबूरी में अपना अस्तित्व बचने के लिए उन लोगों ने मृत जानवरों को खाया. वही आज चमार कहलाये. कोली जाति के लोग भी रूद्र जाति से सम्बन्धी थे. ये लोग समुद्र के किनारे रहते थे. मच्छलियाँ पकड़ना, उनको खाना, उन्ही से अपना घर परिवार चलाना और समाज और शहर के लोगो को खिलाना. यही कोल समाज की परम्परा थी.. इन तथाकथित ब्राह्मणों ने कोल जाति के लोगों को समुद्र तट पर ही रहने के लिए मजबूर किया. वही रहके सड़ते रहो, लेकिन शहरों या समाज के अन्दर नहीं आना. कोल जाति के लोगों परम्परा थी. ये लोग खाना ले के आते थे. इनको कोल बुलाते थे तो कोली जाति बना दी. आज भी तुम लोग देख सकते हो. ब्राह्मण और राजपूत के लाये हुए खाने को धोने के बाद खा लेते है. लेकिन कोली जात के लोगों का बनाया हुआ खाना आज भी नहीं खाते. इसी तरह इन लोगों ने संगीत के कलाकारों को हेशी बना दिया. वो लोग इन के घरों के अन्दर जा सकते है. खाना खा सकते है. लेकिन रसोई तक नहीं जा सकते. मंदिरों के दरवाजे के अन्दर जा सकते है. लेकिन उसके आगे मंदिर में नहीं जा सकते. घर में इन लोगों को नाच गाने करना होता था. तो हेशी जात के लोगों को घर के अन्दर आने की इजाजत थी. इसी तरह इन तथाकथित ब्राहमणों ने बहुत सारी जातियां बनाई. जिस से सिर्फ ब्राह्मणों और राजपूतों को फायदा होना तय था. शुद्र जाति के लोगों के लिए नियम बहुत कठोर थे. ब्राह्मणों कि कन्या या औरतों कि शुद्र आँख उठा कर देख ले तो उसकी आँखे निकल देते थे. आँखों में 9 उंगल कि कील डाल दी जाति थी. जिस से वो आदमी मर जाता था. किसी ने ब्राह्मणों के खिलाफ कुछ बोला. या आवाज उठाई उसकी जीभ कट दी जाती थी. क्यों कि इन्होने खुद को भगवान् जो बना के रख दिया था. किस शुद्र ने इनकी बातों को इनके षडयंत्रो के बारे सुन लिया तो उसके कान में गरम गरम शीशा डाल दिया जाता था. हमारे लोगो को जाति समाज के दर्जे के नाम पर बनता गया. आज भी भारत के सभी राज्यों में हजारों हज़ार अनुसूचित जाति और अनसुचित जाति के नाम पर लोग बंटे हुए है.

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