Meaning of Chamar


चमार- एक ऐसा शब्द जिस से सारा देश घृणा करता है, यहाँ तक चमार शब्द से मूल निवासी भी घृणा करते है। भारत के सभी वर्गों ने इस शब्द को इतना नीच समझ लिया है कि आज भारत के चमार जाति के लोग भी खुद को चमार नहीं कहलाना चाहते। परन्तु क्या किसी ने अपने दिमाग पर जोर डाल कर कभी यह सोचा कि चमार शब्द का अर्थ क्या है? कोई क्यों सोचेगा.. हजारो बर्षों से सभी के दिलोदिमाग पर चमार शब्द का मतलब नीच, गाये का मांस खाने वाला या जुत्ते बनाने वाला अर्थ बैठा हुआ है। ब्राह्मणों ने जो बोला वही सबके लिए सत्य हो गया। लेकिन सच क्या है ये आज हम आपको बताते है।chamardweepचमार शब्द को अगर विभाजित किया जाये तो चमार= च+मा+र बनता है, च= चमड़ी, मा= मांस और र= रक्त। तो चमार का अर्थ हुआ चमड़ी, मांस और रक्त से बना इन्सान, लेकिन कोई भी भारत का निवासी इस बात को मानने को तैयार ही नहीं है।

क्या गाये का मांस खाने वाले को चमार कहते है? तो हमारी टीम आप सभी को गाये का मांस खाने वालों की सच्चाई बताते है। पुरे भारत में ऐसा कोई वंश या जाति नहीं है जिसने मृत गाये का मांस ना खाया हो। पहले ब्राह्मणों, राजपूतों और वैश्यों को ही लेते है। तो ऋग्वेद का अध्ययन करने से पता चलता है कि ईसा से 3200 साल पहले और 16 ईसवी तक ब्राह्मण गौ मांस खाते थे। ऋग्वेद के इन श्लोकों को पढ़ कर देखो:

1- जिन घोड़ो को अग्नि मे बली दी जाती है ,जो जल पिता है जिसके ऊपर सोमरस रहता है ,जो यज्ञ का अनुष्ठाता है ,उसकी एवम उस अग्नि को मै प्रणाम करता हूँ। ( ऋग्वेद 10,91,14)
2- इंद्रा कहते है ,इंद्राणी के द्वारा प्रेरित किए गए यौगिक लोग 15-20 सांड काटते और पकाते है और उन्हे खाते है तो मोटा होता हूँ । -ऋग्वेद 10,83,14
3- जो गाय अपने शरीर को देवों के लिए बलि दिया करती है ,जिन गायों की आहुतियाँ सोम जानते है , हे इंद्रा! उन गायों को दूध से परिपूर्ण और बच्छेवाली करके हमारे लिए गोष्ठ मे भेज दे । – ऋग्वेद 10,16,92
4- हे दिव्य बधिको! अपना कार्य आरंभ करो और तुम जो मानवीय बधिक हो ,वह भी पशु के चरो और आग घूमा चुकाने के बाद पशु पुरोहित को सौप दो। (एतरे ब्राह्मण )
5*-*****एतद उह व परम अन्नधम यात मांसम। ( सत्पथ ब्राह्मण11,4,1,3)
अर्थ ;- सटपथ ब्राह्मण कहता है, की जीतने भी प्रकार के खाद्द अन्न है ,उन सब मे मांस सर्वोतम है

6. महर्षि याज्यावल्क्या ने षत्पथ ब्राह्मण (3/1/2/21) में कहा हैं कि: -”मैं गोमांस ख़ाता हूँ, क्योंकि यह बहुत नरम और स्वादिष्ट है.”
7. आपास्तंब गृहसूत्रां (1/3/10) मे कहा गया हैं,”गाय एक अतिथि के आगमन पर, पूर्वजों की’श्रद्धा’के अवसर पर और शादी के अवसर पर बलि किया जाना चाहिए.” ऋग्वेद (10/85/13) मे घोषित किया गया है,”एक लड़की की शादी के अवसर पर बैलों और गायों की बलि की जाती हैं.”
8. पिबा सोममभि यमुग्र तर्द ऊर्वं गव्यं महि गर्णानैन्द्र
वि यो धर्ष्णो वधिषो वज्रहस्त विश्वा वर्त्रममित्रिया शवोभिः ||
वशिष्ठ धर्मसुत्रा (11/34) लिखा हैं,”अगर एक ब्राह्मण श्राद्ध या पूजा के अवसर पर उसे प्रस्तुत किया गया मांस खाने से मना कर देता है, तो वह नरक में जाता है.”
9. हिंदू धर्म के सबसे बड़े प्रचारक स्वामी विवेकानंद ने इस प्रकार कहा:”तुम्हें जान कर आश्चर्या होगा है कि प्राचीन हिंदू संस्कार और अनुष्ठानों के अनुसार, एक आदमी एक अच्छा हिंदू नही हो सकता जो गोमांस नहीं खाए. (The Complete Works of Swami Vivekanand, volume.3, page no. 536)

तो क्या इन प्रमाणों से साबित है हो जाता कि विदेशी आर्य गौ मांस खाते थे?

ये थे वैदिक और पुराणों पर आधारित प्रमाण, अब हम विज्ञान की बात करे तो यह बात और भी ज्यादा आसानी से समझ आ जाती है। विज्ञान कहता है कि दुनिया का हर बड़ा या समझदार जानवर अपने कुल, वंश और अपनी जाति की रक्षा के लिए छोटे जानवरों को खाता है और यह परम्परा करोड़ों सालों से चली आ रही है। यह 20वी सदी चल रही है, जहा सारी दुनिया चाँद और मंगल पर अपनी मानव सभ्यता बसाने कि बात कर रही है, वहा भारत के लोगों की इस सोच पर सारी दुनिया हँसेगी नहीं तो क्या करेगी?
सभी मूल निवासियों के इतिहास का अध्ययन करने से पता चलता है कि किसी समय एशिया महाद्वीप को चमारद्वीप कहा जाता था। जो बाद में जम्बारद्वीप के नाम से जाना गया और कालांतर में वही जम्बारद्वीप, जम्बूद्वीप के नाम से प्रसिद्ध हुआ था। चमारद्वीप की सीमाए बहुत विशाल थी। चमारद्वीप की सीमाए अफ्गानिस्तान से श्री लंका तक, ऑस्ट्रेलिया, प्रायदीप और दक्षिण अफ्रीका तक फैली हुई थी। 3200 ईसा पूर्व जब यूरेशियन चमारद्वीप पर आये तो देश का विघटन शुरू हुआ। क्योकि हर कोई अपने आप को युरेशियनों से बचाना चाहता था। जैसे जैसे देश का विघटन हुआ, बहुत से प्रदेश चमारद्वीप से अलग होते गए और चमारद्वीप का नाम बदलता गया। भारत के नामों का इतिहास कोई ज्यादा बड़ा नहीं है परन्तु हर मूल निवासी को इस इतिहास का पता होना बहुत जरुरी है, तो ईसा से 3200 साल पहले एशिया महाद्वीप का नाम चमारद्वीप था, यूरेशियन भारत में आये तो जम्बारद्वीप हो हो गया, 485 ईसवी तक भारत का नाम जम्बूद्वीप था, 485 ईसवी में सिद्धार्थ बौद्ध ने मूल निवासियों के लिए क्रांति की, सभी मूल निवासियों को इकठ्ठा करने की कोशिश की। इस में सिद्धार्थ गौतम अर्थात बौद्ध धर्म को बहुत सफलता मिली थी। किन्तु युरेशियनों ने झूठे बौद्ध भिक्षु बन कर बौद्ध धर्म का विनाश कर दिया। इस प्रकार 600 या 800 ईसवी में भारत का नाम आर्यवर्त रखा गया। 1600 ईसवी अर्थात भक्ति काल तक भारत का नाम आर्यवर्त था। भारत का नाम किसी महान राजा भरत के नाम पर रखा गया है यह एक काल्पनिक कहानी है। असल में 1600 ईसवी में मनु नाम के एक यूरेशियन ब्राह्मण ने मनु समृति लिख कर फिर से भारत पर ब्राह्मणों अर्थात युरेशियनों का शासन स्थापित किया था। मनु के एक बेटे का नाम भरत था। उसी भरत के नाम पर आर्यवर्त को भारत कहा गया। आज़ादी के बाद भारत की संसद में एक प्रस्ताव पारित करके भारत का नाम इंडिया रख दिया गया।

तो इतिहास से यह सत्य सामने आता है कि भारत के सभी मूल निवासी चमारद्वीप के निवासी चमार है। जिनको अपने फायदे के लिए युरेशियनों ने 7500 अलग जातियों में बाँट दिया और यही वो जाति व्यवस्था है जिसके कारण आज भी भारत पर यूरेशियन ब्राह्मणों, राजपूतों और वैश्यों का शासन है। कोई भी मूल निवासी सच्चाई नहीं जानता और झूठे ब्राह्मणों के प्रपंचो में पद कर आपस में बंटा हुआ है। सभी मूल निवासियों को चाहिए कि सच्चाई को जाने, चमार बन कर ब्राह्मणवाद के खिलाफ खड़े हो जाये। तभी इडिया के शासन को डोर मूल निवासियों के हाथों में आ सकती है, और इडिया के मूल निवासियों को उनका गौरव प्राप्त हो सकता है।

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5 Responses to Meaning of Chamar

  1. ajay kumar says:

    Jai bhim ,jai mulnivaci is post ke liye dhanyavad .

  2. ramprakash says:

    आप को धन्यवाद करता हूँ जो आपने इतने विस्तार से बताया है। जय भीम

  3. rohit says:

    Nice line

  4. vikram singh says:

    Bhai can someone tell me the truth that asia continent was chamardweep because there is no solid evidence on internet about chamardweep

  5. Pingback: Origin of Chamar – Site Title

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