Aarkshan Ka Sach


करीब 2000 साल पहले जातियों का बनना शुरू हुआ ऐसा माना जाता है पहले कर्म आधारित जातियाँ नहीं थी । ब्राहमण ने भारतीय मूल निवासियो पर जीत के उपरांत जीते हुए लोगो को शुद्र कहना प्रारंभ किया . अब यहाँ एक प्रश्न बनता है कि ब्राह्मण ने शुद्र वर्ण क्यों बनाया। इसका मुख्य कारण था ये वर्ग ब्राहमण के अंधविश्वास और कर्म-कांडों का प्रबल विरोधी था । और ब्राहमण के दमनकारी शासन को स्वीकार नहीं करता था …ब्राहमण ने इस वर्ग पर जीत के उपरांत अपनी दमन कारी नीतियों से इस वर्ग को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से बिल्कुल कमजोर कर दिया। धार्मिक दृष्टी से शूद्र वर्ण में इस वर्ग को सम्मिलित कर लेने से ब्राह्मण ने अपनी सत्ता को और मजबूत कर लिया।इस वर्ग के पास सेवा करने के अलावा कुछ और साधन नहीं था … कालांतर में ऐसा माना जाता है गुप्त साम्राज्य जिसका शासन काल 320 -550 ई तक माना जाता है कर्म आधारित जातियाँ जन्म आधारित हो गई ।
ambedkar4जब जातियाँ जन्म आधारित हो गयी तो जातियों ने भी अपना वर्ग बना लिया( डॉ अम्बेडकरजी कहते है वर्ण व्यवस्था का बिगड़ा हुआ रूप ही जाति – व्यवस्था है. ) जो भी जातियाँ बनी वो शुद्र वर्ण में ही बनी आप आज भी देख सकते है ब्राहमण , क्षत्रिय और वैश्य वर्ण है जाति नहीं।
लेकिन आप शूद्र वर्ण में करीब 6000 से ज्यादा जातियों को देख सकते हो। कुछ जातियों को दूषित कर्म की वजेह से अति-शूद्र भी कहा गया। जाति -व्यवस्था के कारण ये समाज आर्थिक और सामाजिक दृष्टी से पिछड़ता चला गया . भारत में अंग्रेजी शासन के समय एक नए युग का आरम्भ हुआ जिसको आधुनिक युग कहा जाता है। इस युग के दौरान पिछड़े और वंचित वर्ग में राजनीतिक चेतना आई और उन्होंने अपने आधिकारो की मांग तेज़ कर दी । इन आंदोलनों का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक और शिक्षा में पूर्ण अधिकारों की मांग थी महात्मा ज्योतिवा फुले व डॉ आंबेडकर इस वर्ग के सुधार के प्रबल अग्रणीकर्ता थे. डॉ अम्बेडकरजी ने वंचित वर्ग के लिए अलग से निर्वाचन क्षेत्र की मांग की । इसके विरोध में गांधीजी ने भूख-हड़ताल शुरू की।समाधान के तौर पर आरक्षण की सुविधा वंचित वर्ग को दिए जाने पर सहमति बनी ।और साथ ही पिछड़ा वर्ग के लिए भी आरक्षण का प्रावधान पारित हुआ लेकिन वंचित वर्ग के साथ लागू नहीं हुआ। आरक्षण एक अस्थाई समझोता था।
भारतीय संविधान के अनुसार जाति के आधार पर अंतर नही किया जाएगा और आरक्षण का प्रावधान जातियों के लिए नहीं था आरक्षण का प्रावधान वर्ग के लिए थे जैसे SC वर्ग की जातियों को अनुसूचित जातियों से जाना जायेगा।
ST को अनुसूचित जनजाति से।
तथा OBC को पिछड़ी जाति से।
मतलब ये आरक्षण का प्रावधान वर्ग भेद के लिए था न की जातियों के लिये…और आरक्षण का प्रावधान जनसँख्या के अनुपात में था। लेकिन आरक्षण लागू होने के बाद भी आरक्षण सर्टिफिकेट पर जाति का उल्लेख स्पष्ट करता है ब्राह्मणवादी व्यवस्था जाति को खत्म नहीं करना चाहती। और इस वर्ग के नेता राजनीतिक वोटों के लिए इसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं रखते।
हम भी मानते है आज आरक्षण का लाभ जरूरतमंद लोगों को नहीं मिल पा रहा . और इसमें सुधार होने की गुंजाइश है। लेकिन ब्राहमण वर्ग का एक ही कहना है आरक्षण आर्थिक आधार पर हो। तो हमारा भी कहना साफ़ है आरक्षण हमारे जनसँख्या अनुपात में है। हमारी भी भागीदारी है भारतीय व्यवस्था में । जिस दिन वर्ग भेद खत्म हो जायगा उस दिन आरक्षण हट जायेगा।अगर आप लोग मेरिट की बात करते हो तो मेरिट साक्षरता पर डिपेंड करती है। स्वर्ण वर्ग का साक्षरता प्रतिशत अच्छा है और क्योकि अभी भी पिछड़ा और वंचित वर्ग आधिकारो में पिछड़े हुए है। शिक्षा का स्तर बहुत ही बेकार है इसलिए इस वर्ग का साक्षरता रेट कम है। इसलिए सम्भव है सामान्य वर्ग की मेरिट ज्यादा जाती है।
आरक्षण के लिए आज एक बात महत्वपूर्ण है क्योकि आज प्रतियोगिता का दौर है हर वर्ग विशेष प्रतियोगिता के लिए कोचिंग संस्थानों पर निर्भर करता है।और क्योकि गरीब पिछड़ा और गरीब वंचित वर्ग के लोग कोचिंग संस्थानों की फीस नहीं जुटा पाते पाते इसी वजेह से वो अभी भी प्रतियोगिता में पीछे है। वर्ग में सिर्फ उसी का फायदा ज्यादा हो रहा है जो पहले से आर्थिक रूप से सही है। लेकिन नेताओं का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। इसी वजेह से वो अभी भी प्रतियोगिता में पीछे है। वर्ग में सिर्फ उसी का फायदा ज्यादा हो रहा है जो पहले से आर्थिक रूप से सही है। लेकिन नेताओं का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। और मतलब परस्त लोग आरक्षण का लाभ उठा कर जरूरी नहीं समझते कि उनकी भी कुछ जिम्मेदारी बनती है अपने वर्ग विशेष के लोगो के लिये।ताकि उनकी सहायता प्राप्त कर वंचित वर्ग में कुछ ज्ञान का प्रसार हो हमारा फ़र्ज़ बनता है अपने वंचित वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखें .इसलिए मैं विनती करता हूँ आप मित्रो से कि आरक्षण में संसोधन की मांग करे और अपने जरूरतमंद भाइयो को आरक्षण का लाभ पहुचाने की कोशिश करे।ताकि हमारा वंचित वर्ग जल्दी ही गरीबी से बाहर आ सके।

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